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योगासन करते समय सांस लेने और छोड़ने का सही नियम क्या है

क्या आप योगासन करते समय अपनी सांस रोक लेते हैं? जानें कैसे योग प्रैक्टिस में सांसों का सही उपयोग आपके अनुभव को बेहतर बना सकता है। सरल भाषा में समझें कि कब सांस लेनी है और कब छोड़नी है।योगासन करते समय सांस लेने और छोड़ने का सही नियम क्या है

साधना विज्ञान

Rajesh Kumar

4/16/20261 मिनट पढ़ें

योगासन करते समय सांस लेने और छोड़ने का सही नियम क्या है
योगासन करते समय सांस लेने और छोड़ने का सही नियम क्या है

मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है कि आप अपनी सेहत का अच्छे से ख्याल रख रहे होंगे। आज मैं आपसे एक ऐसी बात पर चर्चा करना चाहता हूं, जो योग करते समय हम में से ज्यादातर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हम चटाई (yoga mat) बिछा लेते हैं, अच्छे कपड़े पहन लेते हैं और कठिन से कठिन आसन करने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन एक चीज़ है जहाँ हम अक्सर चूक जाते हैं वो है हमारी सांस।

अक्सर मैंने देखा है कि जब लोग योग क्लास में होते हैं या घर पर वीडियो देखकर अभ्यास करते हैं, तो आसन की मुद्रा (pose) बनाने के चक्कर में अपनी सांस रोक लेते हैं। उनका चेहरा लाल हो जाता है, शरीर में तनाव आ जाता है और योग का जो असली आनंद मिलना चाहिए, वो कहीं खो जाता है। जहां तक वास्तविकता की बात है, बिना सही तरीके से सांस लिए योग करना सिर्फ एक साधारण कसरत या स्ट्रेचिंग जैसा ही है।

आइए अब जानते हैं कि आखिर योग और सांसों का यह तालमेल इतना जरूरी क्यों है और इसके सही नियम क्या हैं।

योग में सांस लेने का सीधा सा गणित

मेरे अनुभव में आया है कि योग में सांस लेने का नियम बहुत ही सरल है, बस हमें उसे थोड़ा होशपूर्वक समझने की जरूरत है। अगर आप इस एक मूल मंत्र को समझ लें, तो आप कभी गलती नहीं करेंगे। नियम यह है: जब शरीर फैले या ऊपर उठे तो सांस भरें, और जब शरीर सिकुड़े या नीचे झुके तो सांस छोड़ें।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप खड़े होकर अपने दोनों हाथों को आसमान की तरफ उठा रहे हैं। यहाँ आपका सीना (chest) खुल रहा है और फेफड़ों को फैलने की जगह मिल रही है, तो यहाँ आपको गहरी सांस अंदर लेनी है। अब वहीं से अगर आप नीचे झुककर अपने पैरों को छूने की कोशिश करते हैं, तो आपका पेट दबता है। ऐसे में आपको सांस बाहर छोड़नी चाहिए।

यह इतना ही आसान है! बस अपने शरीर की गति को अपनी सांसों के साथ जोड़ दीजिए।

ऊपर की ओर उठने वाले आसनों में सांस का नियम

अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और कुछ खास स्थितियों की बात करते हैं। जब भी हम पीछे की ओर झुकने वाले आसन करते हैं, जैसे कि 'भुजंगासन' (Cobra Pose) या 'ताड़ासन', तो हमारा पूरा ध्यान सांस भरने पर होना चाहिए।

मुझे याद है, जब मैंने पहली बार भुजंगासन किया था, तो मैं सांस रोककर ऊपर उठने की कोशिश कर रहा था। नतीजा यह हुआ कि दो मिनट में ही मेरा दम फूलने लगा और मुझे लगा कि योग तो बहुत मुश्किल है। लेकिन जैसे ही मेरे गुरु ने मुझे बताया कि ऊपर उठते समय लंबी गहरी सांस अंदर खींचनी है, तो मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर खुद-ब-खुद ऊपर की ओर उठ रहा है। सांस आपके शरीर के लिए ईंधन का काम करती है। जब आप सांस भरते हैं, तो आपकी रीढ़ की हड्डी को सहारा मिलता है और आप बेहतर तरीके से स्ट्रेच कर पाते हैं।

नीचे झुकते समय सांस छोड़ने का विज्ञान

अब बात करते हैं उन आसनों की जिनमें हमें आगे झुकना पड़ता है, जैसे 'पादहस्तासन' या 'पश्चिमोत्तानासन'। यहाँ बहुत से लोग गलती करते हैं। वे सांस रोककर जबरदस्ती अपने अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करते हैं।

सच तो यह है कि जब आप सांस छोड़ते हैं, तो आपका पेट खाली हो जाता है और आपकी मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ जाता है। मैंने देखा है कि अगर आप सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे झुकें, तो आप बिना किसी परेशानी के अपने पैरों को छू पाएंगे। सांस छोड़ना शरीर को 'रिलैक्स' करने का संकेत देता है। इसलिए, जब भी झुकना हो, तो लंबी सांस बाहर निकालें और शरीर को ढीला छोड़ दें।

ट्विस्टिंग या शरीर को घुमाते समय क्या करें?

योग में शरीर को दाईं या बाईं ओर घुमाने वाले आसन (twisting poses) बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन यहाँ सांस का नियम थोड़ा अलग और दिलचस्प है।

जब आप सीधे बैठे हों, तो गहरी सांस लें ताकि आपकी रीढ़ की हड्डी लंबी और सीधी हो जाए। अब, जैसे ही आप मुड़ना या ट्विस्ट करना शुरू करें, धीरे-धीरे सांस छोड़ें। मुझे लगता है कि ट्विस्टिंग बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम किसी गीले कपड़े को निचोड़ते हैं। जब आप सांस छोड़ते हैं, तो आपके पेट के अंगों पर सही दबाव पड़ता है और शरीर के अंदर की गंदगी (toxins) बाहर निकलने में मदद मिलती है। याद रखें, बिना सांस छोड़े किया गया ट्विस्ट आपके शरीर में अकड़न पैदा कर सकता है।

जब आसन में रुकना हो तब सांस कैसे लें?

यह एक बहुत बड़ा सवाल है जो मेरे कई दोस्त मुझसे पूछते हैं— "भाई, जब हम किसी आसन में 30 सेकंड या 1 मिनट के लिए रुकते हैं, तब क्या सांस रोककर रखनी है?"

मेरा जवाब है: बिल्कुल नहीं!

योग में 'कुंभक' (सांस रोकना) एक बहुत ही उन्नत (advanced) क्रिया है, जिसे बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। साधारण योगाभ्यास के दौरान, जब आप किसी मुद्रा में रुकते हैं, तो आपकी सांस 'नॉर्मल' यानी सामान्य होनी चाहिए। न तो उसे बहुत तेज चलाएं और न ही रोकें। बस गहरी और धीमी सांस लेते रहें।

मैंने महसूस किया है कि जब हम किसी आसन में रुककर गहरी सांस लेते हैं, तो हमारा दिमाग शांत हो जाता है और हम उस आसन में ज्यादा देर तक टिक पाते हैं। तो अगली बार जब आप वृक्षासन में एक पैर पर खड़े हों, तो सांस रोकने के बजाय अपनी सांसों की लय पर ध्यान दें, आप पाएंगे कि आपका संतुलन पहले से बेहतर हो गया है।

नाक से सांस लें या मुंह से?

योगासन करते समय यह नियम सबसे पक्का है—सांस हमेशा नाक से ही लेनी और छोड़नी है। हमारे नाक के बाल और झिल्ली हवा को छानकर और शरीर के तापमान के अनुसार गर्म करके अंदर भेजते हैं।

मुंह से सांस लेना शरीर को जल्दी थका देता है और इससे गले में सूखापन भी आ सकता है। जहां तक वास्तविकता की बात है, मुंह से सांस हम तब लेते हैं जब हमारा शरीर 'स्ट्रेस' में होता है या हम बहुत तेज भाग रहे होते हैं। योग शांति का मार्ग है, इसलिए अपनी नाक का ही इस्तेमाल करें। हां, कुछ खास प्राणायाम जैसे 'शीतली' में मुंह का इस्तेमाल होता है, लेकिन आम आसनों में सिर्फ और सिर्फ नाक।

मेरे राहुल दोस्त की एक छोटी सी कहानी

यहाँ मुझे अपने एक दोस्त राहुल की याद आ रही है। राहुल ने बड़े जोश में जिम छोड़कर योग करना शुरू किया। वह जिम वाली आदत की वजह से योग में भी बहुत ताकत लगाता था। एक दिन उसने मुझे बताया कि योग करने के बाद उसे शांति मिलने के बजाय सिरदर्द होने लगता है।

जब मैंने उसे अभ्यास करते देखा, तो समझ आया कि वह हर आसन में अपनी सांस रोक रहा था। वह आसन तो एकदम परफेक्ट बना रहा था, लेकिन उसका शरीर अंदर से ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा था। मैंने उसे बस इतना कहा, "राहुल, अपनी सांसों को अपना दोस्त बना ले, दुश्मन नहीं।" उसने अपनी सांसों पर काम करना शुरू किया और आज वह कहता है कि अब उसे योग के बाद ऐसा लगता है जैसे वह बादलों पर तैर रहा हो।

कहने का मतलब यह है कि अगर आप गलत तरीके से सांस लेंगे, तो योग आपको फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है।

सांसों के प्रति जागरूकता कैसे बढ़ाएं?

शुरुआत में यह थोड़ा कठिन लग सकता है कि आसन भी सही करना है और सांसों पर भी ध्यान देना है। लेकिन घबराइए मत, यह अभ्यास से आ जाता है।

मेरे अनुभव में आया है कि आप योग शुरू करने से पहले 5 मिनट शांत बैठकर अपनी आती-जाती सांसों को बस देखें। इससे आपका मन वर्तमान में आ जाएगा। जब आप अभ्यास शुरू करें, तो हर बार अपने आप से पूछें—"क्या मैं अभी सांस ले रहा हूं?"

कुछ लोग बहुत जोर-जोर से सांस लेते हैं जैसे वे खर्राटे ले रहे हों। इसकी भी जरूरत नहीं है। आपकी सांस इतनी कोमल और शांत होनी चाहिए कि अगर आपकी नाक के पास एक रूई का फाहा रखा जाए, तो वह भी न हिले।

योग में सांस लेने के कुछ सुनहरे नियम एक नज़र में

आइए, अब उन बातों को संक्षेप में दोहरा लेते हैं जिन्हें हमने अभी तक समझा है:

ऊपर या पीछे जाते समय: हमेशा सांस अंदर भरें (Inhale)। इससे सीना खुलता है और ऊर्जा मिलती है।

नीचे या आगे झुकते समय: हमेशा सांस बाहर छोड़ें (Exhale)। इससे पेट खाली होता है और झुकना आसान होता है।

ट्विस्ट करते समय: सीधा होते समय सांस लें और मुड़ते समय सांस छोड़ें।

आसन में रुकते समय: सांस को सामान्य और लयबद्ध रखें। उसे कभी न रोकें।

जरिया: हमेशा नाक से ही सांस लें, मुंह का इस्तेमाल न करें।

गहराई: सांस हमेशा गहरी और धीमी होनी चाहिए, उथली या तेज नहीं।

क्या गलत सांस लेने से कोई नुकसान हो सकता है?

अक्सर लोग इस बात को हल्के में ले लेते हैं। मुझे लगता है कि यह बताना जरूरी है कि गलत तरीके से सांस लेना आपके नर्वस सिस्टम को परेशान कर सकता है। अगर आप सांस रोककर मेहनत वाले आसन करते हैं, तो आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन (cramps) भी आ सकते हैं। योग का मकसद शरीर को खोलना और तनाव मुक्त करना है, उसे और ज्यादा तनाव में डालना नहीं।

इसलिए, अगर कभी आपको लगे कि आपकी सांस बहुत तेज चल रही है या आप हांफ रहे हैं, तो तुरंत रुक जाएं। 'शवासन' या 'बाल-आसन' (Child's Pose) में आराम करें और अपनी सांसों को सामान्य होने दें। शरीर के साथ कभी जबरदस्ती न करें।

अभ्यास को मजेदार बनाएं

योग कोई सजा नहीं है, यह एक उत्सव है। जब आप अपनी सांसों के साथ तालमेल बिठा लेते हैं, तो आपको ऐसा लगेगा जैसे आप डांस कर रहे हैं। सांस आपको एक आसन से दूसरे आसन में ले जाने वाली लहर की तरह काम करेगी।

मेरे प्यारे दोस्तों, उम्मीद है कि अब आप जब कल सुबह अपनी योगा मैट पर उतरेंगे, तो अपनी सांसों का खास ख्याल रखेंगे। शुरू में शायद आप भूल जाएं, लेकिन जैसे ही याद आए, बस एक गहरी सांस लीजिए और फिर से शुरू हो जाइए।

याद रखिए, योग में 'परफेक्शन' वो नहीं है कि आप अपने पैर के अंगूठे को छू पाते हैं या नहीं, बल्कि 'परफेक्शन' ये है कि आप उस दौरान कितनी शांति और सही सांस के साथ वहां तक पहुंचे हैं।

तो चलिए, आज से ही अपनी सांसों पर ध्यान देना शुरू करते हैं। अगर आपके मन में कोई सवाल हो या आप अपना कोई अनुभव साझा करना चाहते हैं, तो बेझिझक मुझसे बात करें। आखिर हम दोस्त ही तो हैं!

अगली बार जब हम मिलेंगे, तो योग के किसी और मजेदार पहलू पर बात करेंगे। तब तक के लिए, खुश रहिए, स्वस्थ रहिए और गहरी सांसें लेते रहिए!