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सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के भयंकर दर्द से छुटकारा पाने के लिए 5 अचूक योगासन
क्या आप गर्दन और कंधों के दर्द से परेशान हैं? जानें सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए 5 आसान योगासन। सिर्फ 20 मिनट में दर्द से राहत पाएं और स्वस्थ जीवन की शुरुआत करें।सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के भयंकर दर्द से छुटकारा पाने के लिए 5 अचूक योगासन
YOGA THERAPY
Rajesh Kumar
5/10/20261 मिनट पढ़ें


नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! कैसे हैं आप सब? उम्मीद है सब बढ़िया होगा।
आज मैं आपसे एक ऐसी समस्या पर बात करने वाला हूँ जो आजकल घर-घर की कहानी बन गई है। क्या आपको भी कभी ऐसा लगा है कि आपकी गर्दन पत्थर जैसी सख्त हो गई है? या फिर सुबह सोकर उठते ही ऐसा लगता है कि गर्दन घुमाना भी एक बड़ा टास्क है? अगर हाँ, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं।
अभी पिछले महीने की बात है, मेरा एक दोस्त राहुल, जो दिन भर लैपटॉप पर चिपका रहता है, अचानक ऑफिस से गायब रहने लगा। मैंने फोन किया तो पता चला कि भाई साहब की गर्दन और कंधों में इतना तेज दर्द है कि वह सीधे बैठ भी नहीं पा रहे। डॉक्टर ने बताया कि यह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की शुरुआत है।
सच कहूँ तो, जहाँ तक वास्तविकता की बात है, हमारा 'डिजिटल' होना हमें जितना आराम दे रहा है, उतना ही हमारी गर्दन और रीढ़ की हड्डी का बैंड भी बजा रहा है। घंटों झुककर फोन चलाना या गलत तरीके से बैठकर काम करना हमें इस दर्द की खाई में धकेल देता है। लेकिन घबराइए मत, मैंने राहुल को कुछ ऐसे योगासन बताए जिनसे उसे जादुई राहत मिली।
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं उन 5 योगासनों के बारे में जो आपके इस भयंकर दर्द को जड़ से खत्म करने में मदद करेंगे।
गर्दन के लिए संजीवनी: भुजंगासन
मेरे अनुभव में आया है कि जब हम दिन भर आगे झुककर काम करते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार बिगड़ने लगता है। भुजंगासन जिसे हम 'कोबरा पोज़' भी कहते हैं, इस समस्या का सबसे सटीक इलाज है।
जब आप पेट के बल लेटकर अपने शरीर के अगले हिस्से को ऊपर उठाते हैं, तो आपकी गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में एक बहुत ही प्यारा खिंचाव महसूस होता है। यह खिंचाव उन दबी हुई नसों को खोलने का काम करता है जो दर्द का असली कारण होती हैं। मुझे याद है जब मैंने पहली बार इसे ट्राई किया था, तो मेरी गर्दन की जकड़न में तुरंत सुधार दिखा था। बस ध्यान रहे, इसे करते समय जल्दबाजी न करें, धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार ही ऊपर उठें।
मार्जरी आसन: गर्दन और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन
इसे 'कैट-काउ पोज़' भी कहा जाता है। यह आसन मेरा पर्सनल फेवरेट है क्योंकि इसे करना बहुत आसान है और इसके फायदे बहुत ज्यादा हैं। इसमें आपको अपने घुटनों और हाथों के बल आना होता है और फिर अपनी कमर को ऊपर-नीचे करना होता है।
मैंने देखा है कि जो लोग ऑफिस में लगातार 8-9 घंटे बैठकर काम करते हैं, उनकी रीढ़ की हड्डी में अकड़न आ जाती है। मार्जरी आसन उस अकड़न को मक्खन की तरह पिघला देता है। जब आप अपनी गर्दन को ऊपर उठाते हैं और फिर अंदर की तरफ सिकोड़ते हैं, तो यह आपकी गर्दन की हड्डियों (Cervical vertebrae) को बहुत जरूरी मसाज देता है। इसे कम से कम 10 बार दोहराएं, आपको खुद महसूस होगा कि गर्दन कितनी हल्की हो गई है।
ताड़ासन: शरीर को सही आकार देने का तरीका
शायद आप सोच रहे होंगे कि खड़े होकर हाथ ऊपर करने से गर्दन का दर्द कैसे ठीक होगा? लेकिन दोस्तों, ताड़ासन पूरे शरीर के एलाइनमेंट (Alignment) को सुधारता है। अक्सर सर्वाइकल का दर्द इसलिए होता है क्योंकि हम सही से खड़े नहीं होते या बैठते नहीं।
ताड़ासन करते समय जब आप अपनी एड़ियों को उठाते हैं और हाथों को आसमान की तरफ खींचते हैं, तो आपकी पूरी रीढ़ की हड्डी खिंचती है। यह खिंचाव गर्दन पर पड़ रहे दबाव को कम कर देता है। मुझे लगता है कि हर किसी को सुबह उठते ही सबसे पहले ताड़ासन जरूर करना चाहिए। यह न केवल आपके दर्द को कम करेगा बल्कि आपकी बॉडी को एक अच्छी शेप भी देगा।
शशकासन: तनाव और दर्द से मुक्ति
सर्वाइकल के दर्द का एक बड़ा कारण मानसिक तनाव भी होता है। जब हम तनाव में होते हैं, तो अनजाने में अपने कंधों को सिकोड़ लेते हैं, जिससे गर्दन की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। शशकासन या 'रैबिट पोज़' मन को शांत करने और गर्दन को आराम देने के लिए बेहतरीन है।
इसमें आपको वज्रासन में बैठकर आगे की ओर झुकना होता है और अपना माथा जमीन पर टिकाना होता है। इस स्थिति में आने के बाद जब आप गहरी सांस लेते हैं, तो कंधों का सारा बोझ उतरता हुआ महसूस होता है। यह आसन उन लोगों के लिए वरदान है जिन्हें गर्दन दर्द के साथ-साथ सिरदर्द की भी शिकायत रहती है।
उष्ट्रासन: छाती और गर्दन को खोलें
आइए अब जानते हैं उष्ट्रासन यानी 'कैमल पोज़' के बारे में। यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसका असर बहुत गहरा होता है। इसमें घुटनों के बल खड़े होकर पीछे की ओर झुकना होता है और अपने हाथों से एड़ियों को पकड़ना होता है।
जहाँ तक मेरे अनुभव की बात है, यह आसन गर्दन के सामने वाले हिस्से की मांसपेशियों को खोलता है और पीछे की हड्डियों पर दबाव कम करता है। अगर आपको बहुत ज्यादा चक्कर आते हैं या दर्द बहुत ज्यादा है, तो इसे किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें। शुरू में आप सिर्फ अपनी कमर पर हाथ रखकर थोड़ा पीछे झुकने का अभ्यास भी कर सकते हैं।
कुछ छोटी मगर जरूरी बातें
योगासन तो अपनी जगह काम करेंगे ही, लेकिन इसके साथ ही आपको अपनी दिनचर्या में भी कुछ बदलाव करने होंगे। मैंने अक्सर देखा है कि लोग योगा तो करते हैं, लेकिन फिर वही गलत तरीके से फोन देखना शुरू कर देते हैं।
अपना पोस्चर सुधारें:
काम करते समय अपनी स्क्रीन को आँखों के लेवल पर रखें। झुककर काम करना बंद करें।
थोड़ा ब्रेक लें:
हर 45 मिनट के बाद उठें और गर्दन को धीरे-धीरे घुमाएं।
तकिया सही चुनें:
बहुत ऊंचा या बहुत सख्त तकिया आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है। कोशिश करें कि पतला और मुलायम तकिया इस्तेमाल करें या फिर बिना तकिए के सोएं।
मेरे प्यारे दोस्तों, यह शरीर आपका अपना है और इसकी देखभाल करना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। दवाइयाँ शायद कुछ देर के लिए दर्द दबा दें, लेकिन योग इसे जड़ से मिटाने की ताकत रखता है।
मैंने राहुल को ये आसन बताए और आज वह बिना किसी दर्द के अपना काम मजे से कर रहा है। अगर वह कर सकता है, तो आप भी कर सकते हैं। बस जरूरत है थोड़ी सी इच्छाशक्ति की और रोज 20 मिनट खुद को देने की।
मुझे उम्मीद है कि ये छोटे-छोटे सुझाव और योगासन आपके जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएंगे। अगर आपके मन में कोई सवाल हो या आप अपना अनुभव साझा करना चाहते हों, तो बेझिझक बताएं। हम सब यहाँ एक-दूसरे की मदद करने के लिए ही तो हैं।
तो चलिए, आज से ही एक नई शुरुआत करते हैं और इस सर्वाइकल के दर्द को हमेशा के लिए अलविदा कहते हैं! अपना ख्याल रखिएगा।
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