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सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र कौन से हैं और उन्हें करने का बिल्कुल सही तरीका क्या है

जानें सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र कौन से हैं और कैसे इसे सही तरीके से करें। अपने अनुभव से साझा किया गया आसान तरीका आपकी फिटनेस जर्नी शुरू करने में मदद करेगा।सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र कौन से हैं और उन्हें करने का बिल्कुल सही तरीका क्या है

साधना विज्ञान

Rajesh Kumar

4/8/20261 मिनट पढ़ें

soory namaskaar ke 12 mantr kaun se hain aur unhen karane ka bilkul sahee tareeka kya hai
soory namaskaar ke 12 mantr kaun se hain aur unhen karane ka bilkul sahee tareeka kya hai

नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! कैसे हैं आप सब? उम्मीद है कि आप अपनी लाइफ में खुश होंगे और सेहत का ख्याल रख रहे होंगे।

आज मैं आपसे एक ऐसी चीज़ के बारे में बात करने वाला हूँ जिसने मेरी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया। सच कहूँ तो, कुछ साल पहले तक मैं भी आप ही की तरह था—सुबह देर से उठना, दिन भर आलस महसूस करना और हमेशा थका-थका रहना। फिर एक दिन मेरे एक पुराने दोस्त ने मुझे सलाह दी कि "भाई, तू बस सूर्य नमस्कार शुरू कर दे।"

शुरुआत में मुझे लगा कि यार ये तो बहुत पुराना और बोरिंग तरीका है। लेकिन जहाँ तक वास्तविकता की बात है, जब मैंने इसे सही ढंग से और मंत्रों के साथ करना शुरू किया, तो मुझे अहसास हुआ कि हम अपनी ही परंपराओं के खजाने को भूलते जा रहे हैं। आज मैं आपको वही सब बताने जा रहा हूँ जो मैंने अपने अनुभव से सीखा है।

आखिर सूर्य नमस्कार ही क्यों?

मेरे अनुभव में आया है कि लोग जिम जाते हैं, भारी वजन उठाते हैं, लेकिन जो शांति और लचीलापन सूर्य नमस्कार से मिलता है, वो कहीं और नहीं है। इसे 'योगों का राजा' कहा जाता है। अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं उन 12 जादुई मंत्रों और उनके सही स्टेप्स के बारे में।

मैंने देखा है कि अक्सर लोग बस कसरत की तरह इसे करते हैं, लेकिन जब आप हर स्टेप के साथ एक खास मंत्र का उच्चारण करते हैं, तो उसका असर आपके दिमाग पर भी होता है। चलिए, एक-एक करके इन्हें समझते हैं।

1. प्रणाम आसन (Pranamasana) - मंत्र: ॐ मित्राय नम:

सबसे पहले अपने योग मैट के किनारे पर सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों पैरों को मिलाकर रखें और कंधों को ढीला छोड़ दें। अब गहरी साँस लेते हुए अपने दोनों हाथों को छाती के पास लाएँ और 'नमस्ते' की मुद्रा बनाएँ।

मेरा अनुभव: जब आप 'ॐ मित्राय नम:' कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप सूर्य को अपना मित्र मान रहे हैं। यकीन मानिए, सुबह की पहली किरण के साथ जब आप इस भाव में होते हैं, तो आपको अंदर से एक अजीब सी शांति महसूस होती है।

2. हस्त उत्तानासन (Hastauttanasana) - मंत्र: ॐ रवये नम:

अब गहरी साँस भरते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएँ। ध्यान रहे कि आपके हाथ आपके कानों से सटे रहें। अब धीरे-धीरे पीछे की तरफ झुकें।

छोटी सी टिप: बहुत ज़्यादा पीछे झुकने की कोशिश न करें, वरना कमर में खिंचाव आ सकता है। बस उतना ही झुकें जितना आपका शरीर आराम से अनुमति दे। इस मंत्र का अर्थ है 'चमकने वाले को नमन'। जब आप ऊपर देखते हैं, तो ऐसा महसूस करें कि आप सूरज की पूरी ऊर्जा को अपने अंदर सोख रहे हैं।

3. पादहस्तासन (Padahastasana) - मंत्र: ॐ सूर्याय नम:

साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। कोशिश करें कि आपकी हथेलियाँ ज़मीन को छुएँ और आपका सिर घुटनों के पास आ जाए।

एक बात बताऊँ? शुरू-शुरू में मेरे हाथ ज़मीन तक नहीं पहुँचते थे। मैं बहुत परेशान होता था। लेकिन मुझे लगता है कि ज़बरदस्ती करने की ज़रूरत नहीं है। आप जितना झुक सकें उतना ही झुकें, समय के साथ लचीलापन अपने आप आ जाएगा। यह पोज़ आपके पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा है।

4. अश्व संचालनाससन (Ashwa Sanchalanasana) - मंत्र: ॐ भानवे नम:

अब साँस लेते हुए अपने दाएँ (right) पैर को पीछे ले जाएँ और बाएँ पैर को दोनों हाथों के बीच में रखें। दाएँ घुटने को ज़मीन से लगा दें और अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ उठाएँ।

क्यों है ये खास? इसे 'घोड़े की मुद्रा' भी कहते हैं। इस पोज़ में जब आप सामने देखते हैं, तो आपका ध्यान (focus) बढ़ता है। 'ॐ भानवे नम:' का जाप करते हुए महसूस करें कि आपका आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

5. पर्वतासन (Parvatasana) - मंत्र: ॐ खगाय नम:

साँस छोड़ते हुए बाएँ पैर को भी पीछे ले जाएँ। अब अपने कूल्हों (hips) को ऊपर की ओर उठाएँ और एड़ियों को ज़मीन से लगाने की कोशिश करें। आपका शरीर एक उल्टे 'V' के आकार जैसा दिखेगा।

मैंने देखा है: लोग इस आसन में अपनी एड़ियाँ ऊपर उठा लेते हैं। कोशिश करिए कि एड़ियाँ ज़मीन पर टिकी रहें, इससे आपकी पिंडलियों और पैरों की मांसपेशियों में बहुत अच्छा खिंचाव आएगा। यह पूरे शरीर में खून के बहाव को सही करता है।

6. अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara) - मंत्र: ॐ पूष्णे नम:

अब धीरे से अपने घुटनों, छाती और माथे (या ठुड्डी) को ज़मीन से लगाएँ। ध्यान रहे कि आपके कूल्हे थोड़े ऊपर उठे रहेंगे।

आइए अब जानते हैं कि इसे अष्टांग क्यों कहते हैं। क्योंकि इसमें शरीर के आठ हिस्से ज़मीन को छूते हैं। यह समर्पण की भावना सिखाता है। मुझे लगता है कि यह पोज़ हमें विनम्र बनाना सिखाता है। जब हम धरती माँ को नमन करते हैं, तो अहंकार अपने आप कम होने लगता है।

7. भुजंगासन (Bhujangasana) - मंत्र: ॐ हिरण्यगर्भाय नम:

साँस भरते हुए धीरे से अपनी छाती को आगे की ओर ऊपर उठाएँ। अपनी कोहनियों को हल्का सा मोड़कर रखें और ऊपर की ओर देखें।

एक कहानी सुनाता हूँ: मेरी एक दोस्त को अक्सर पीठ दर्द रहता था। उसने जब सही तरीके से भुजंगासन करना शुरू किया, तो कुछ ही हफ्तों में उसे बहुत आराम मिला। लेकिन याद रखें, कंधे कानों के पास नहीं चिपकाने हैं, उन्हें थोड़ा नीचे और पीछे रखें। यह आसन आपकी रीढ़ की हड्डी को लोहे जैसा मज़बूत बना देता है।

8. पर्वतासन (दोहराव) - मंत्र: ॐ मरीचये नम:

अब फिर से साँस छोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएँ और पर्वतासन की स्थिति में आ जाएँ।

यहाँ मंत्र बदल जाता है। 'मरीचि' का अर्थ है किरणों का स्वामी। जैसे-जैसे आप इस पोज़ में वापस आते हैं, आपको महसूस होगा कि आपके शरीर की जकड़न खुल रही है।

9. अश्व संचालनाससन (दोहराव) - मंत्र: ॐ आदित्याय नम:

साँस लेते हुए इस बार अपने दाएँ (right) पैर को दोनों हाथों के बीच में लाएँ। बाएँ घुटने को ज़मीन पर रखें और ऊपर देखें।

ध्यान देने वाली बात: जो पैर हम चौथे स्टेप में पीछे ले गए थे, उसी क्रम को वापस लाना होता है। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है।

10. पादहस्तासन (दोहराव) - मंत्र: ॐ सवित्रे नम:

साँस छोड़ते हुए पीछे वाले पैर को भी आगे लाएँ और घुटनों से सिर सटाने की कोशिश करें।

यह फिर से वही फॉरवर्ड बेंड है। इस वक्त तक आपका शरीर काफी गर्म हो चुका होगा और आप महसूस करेंगे कि अब आप पहले से ज़्यादा झुक पा रहे हैं।

11. हस्त उत्तानासन (दोहराव) - मंत्र: ॐ अर्काय नम:

गहरी साँस लेते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठें, हाथों को ऊपर ले जाएँ और पीछे की ओर झुकें।

अब बस एक आखिरी स्टेप बचा है। यहाँ मंत्र 'अर्काय' का मतलब है जो पूजा के योग्य है। इस स्थिति में अपनी पूरी थकान को बाहर निकलता हुआ महसूस करें।

12. प्रणाम आसन (दोहराव) - मंत्र: ॐ भास्कराय नम:

साँस छोड़ते हुए सीधे खड़े हो जाएँ और हाथों को फिर से नमस्ते की मुद्रा में ले आएँ।

आह! क्या सुकून है! इस आखिरी मंत्र के साथ आप सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं। यहाँ आकर आपका एक चक्र पूरा होता है।

सूर्य नमस्कार करते समय जो गलतियाँ मैंने देखी हैं

मेरे प्यारे दोस्तों, मैंने अक्सर देखा है कि लोग जल्दी-जल्दी में बस 12 स्टेप्स गिनने के चक्कर में रहते हैं। वे साँस लेने और छोड़ने की लय को भूल जाते हैं। जहाँ तक मेरा अनुभव है, सूर्य नमस्कार का असली फायदा तब मिलता है जब आप अपनी साँसों के साथ तालमेल बिठाते हैं।

जल्दबाजी न करें: यह कोई रेस नहीं है। हर आसन को महसूस करें।

साँसों का खेल: नियम बहुत सरल है—जब शरीर फैले या ऊपर जाए तो साँस भरें (Inhale), और जब शरीर झुके या सिकुड़े तो साँस छोड़ें (Exhale)।

मंत्रों की शक्ति: अगर आप मंत्र ज़ोर से नहीं बोल सकते, तो मन में ही बोलें। इससे आपका ध्यान भटकना बंद हो जाएगा।

कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या हम इसे शाम को कर सकते हैं?

वैसे तो इसे सूरज उगते समय करना सबसे अच्छा है, लेकिन अगर आपको सुबह समय नहीं मिलता, तो आप इसे शाम को खाली पेट भी कर सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि खाना खाए हुए कम से कम 3-4 घंटे बीत चुके हों।

कितने सेट करने चाहिए?

शुरुआत में सिर्फ 2 या 4 सेट करें। धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाएँ। मैंने देखा है कि कुछ लोग पहले ही दिन 12 सेट करने की कोशिश करते हैं और अगले दिन बिस्तर से उठ नहीं पाते। ऐसा बिल्कुल न करें। अपने शरीर की बात सुनें।

कौन इसे न करे?

अगर आपको स्लिप डिस्क, बहुत तेज़ पीठ दर्द या हर्निया की समस्या है, तो पहले डॉक्टर से पूछें। पीरियड्स के दौरान भी इसे हल्का रखें या छोड़ दें तो बेहतर है।

चलते-चलते कुछ दिल की बातें

मुझे लगता है कि हमारी भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम खुद को सिर्फ 15-20 मिनट भी नहीं दे पा रहे हैं। सूर्य नमस्कार सिर्फ एक कसरत नहीं है, यह अपने आप से जुड़ने का एक तरीका है। जब आप रोज़ इसे करते हैं, तो आपकी त्वचा चमकने लगती है, आपका गुस्सा कम होने लगता है और आप खुद को पहले से ज़्यादा एक्टिव महसूस करते हैं।

मेरे अनुभव में, सबसे मुश्किल काम मैट पर खड़ा होना है। एक बार आप मैट पर आ गए, तो बाकी काम आसान हो जाता है। तो क्या आप कल सुबह से मेरे साथ यह शुरुआत करेंगे?

उम्मीद है कि आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपके मन में कोई सवाल हो या आप अपना अनुभव शेयर करना चाहें, तो बेझिझक पूछें। हम सब मिलकर एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

स्वस्थ रहें, खुश रहें!