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प्राणिक फूड : अपनी जीवनी शक्ति बढ़ाने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं
क्या आप भरपूर सोने के बाद भी थकान महसूस करते हैं? जानें प्राणिक फूड के बारे में, जो आपके शरीर को असली ऊर्जा और फुर्ती देता है। इस ब्लॉग में जानें कि आपको क्या खाना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।प्राणिक फूड : अपनी जीवनी शक्ति बढ़ाने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं
साधना विज्ञान
Rajesh Kumar
6/5/20261 मिनट पढ़ें


मेरे प्यारे दोस्तों, क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप रात को पूरे आठ घंटे सोए, लेकिन सुबह उठते ही ऐसा लगा जैसे किसी ने रातभर आपसे खेतों में काम कराया हो? बदन भारी, दिमाग सुस्त और बिस्तर से उठने का मन ही नहीं। मेरे साथ तो यह रोज का नाटक था। मुझे लगता था कि शायद काम का तनाव है या शरीर में विटामिन की कमी हो गई है। लेकिन जहां तक वास्तविकता की बात है, असली खेल हमारी थाली में रखी चीज़ों का था, जिस पर मेरा कभी ध्यान ही नहीं गया।
मैंने देखा है कि हम लोग इस बात पर तो बहुत माथापच्ची करते हैं कि खाने में कितना प्रोटीन है, कितना कार्ब्स है या कितनी कैलोरी है। लेकिन हम एक सबसे ज़रूरी चीज़ भूल जाते हैं—भोजन की अपनी ऊर्जा यानी 'प्राण'। जो खाना हम खा रहे हैं, वो हमें ज़िंदगी दे रहा है या हमारी बची-कुची ताकत भी छीन रहा है? मेरे अनुभव में आया कि जैसे ही मैंने अपने खाने के तरीके को बदला, मेरी पूरी दिनचर्या बदल गई। आज हम इसी के बारे में दिल खोलकर बात करेंगे। अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है।
प्राणिक फूड: क्या है इसका सीधा सा मतलब?
सरल शब्दों में कहें तो हर जीवित चीज़ के अंदर एक जीवन ऊर्जा होती है, जिसे हम 'प्राण' कहते हैं। जब हम कोई पौधा उगाते हैं, तो वह सूरज की रोशनी, हवा, पानी और मिट्टी से इस प्राण ऊर्जा को सोखता है। जब हम उस पौधे से मिलने वाले फल या सब्ज़ी को ताज़ा-ताज़ा खाते हैं, तो वह ऊर्जा सीधे हमारे अंदर ट्रांसफर हो जाती है।
मुझे लगता है कि हमारा शरीर एक बैटरी की तरह है। आप इसमें जैसा फ्यूल डालेंगे, यह वैसा ही चलेगी। योग विज्ञान में भोजन को उसके अंदर मौजूद इसी प्राण ऊर्जा के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा गया है:
* पॉजिटिव प्राणिक फूड: जो आपकी ऊर्जा को बढ़ाते हैं। इन्हें खाकर आप फुर्तीला महसूस करते हैं।
* नेगेटिव प्राणिक फूड: जो आपके शरीर से ऊर्जा को खींच लेते हैं। इन्हें खाकर नींद और आलस आता है।
* न्यूट्रल प्राणिक फूड: जो न तो ऊर्जा बढ़ाते हैं और न ही घटाते हैं। ये बस पेट भरने का काम करते हैं।
आइए अब जानते हैं कि हमें अपनी थाली में किन चीज़ों को शामिल करना चाहिए और किनसे बिल्कुल तौबा कर लेनी चाहिए।
पॉजिटिव प्राणिक भोजन: थाली के असली हीरो
अगर आप दिनभर बिना थके काम करना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपका दिमाग एकदम रॉकेट की तरह चले, तो आपको अपने खाने में इन चीज़ों की मात्रा बढ़ानी होगी। ये वो खाने हैं जो सीधे प्रकृति से हमारे पास आते हैं, बिना किसी मिलावट या फैक्ट्री की मशीन से गुज़रे।
1. सफेद कद्दू (पेठा) - ऊर्जा का पावरहाउस
इसके बारे में एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूं। कुछ समय पहले तक मैं सुबह उठते ही दो कप कड़क चाय पीता था ताकि मेरी आंखें खुल सकें। फिर एक दोस्त के कहने पर मैंने सुबह खाली पेट सफेद कद्दू यानी ऐश गार्ड का जूस पीना शुरू किया। शुरू में इसका स्वाद थोड़ा अजीब लगा—बिल्कुल पानी जैसा, बिना किसी स्वाद के। लेकिन सिर्फ एक हफ्ते के अंदर जो बदलाव आया, उसने मुझे हैरान कर दिया।
मेरी सुबह की सुस्ती गायब हो गई। दिमाग इतना शांत और फोकस रहने लगा मानो किसी ने मेडिटेशन मोड ऑन कर दिया हो। इस सब्ज़ी में सबसे ज़्यादा पॉजिटिव प्राण ऊर्जा होती है। अगर आपको यह जूस न मिले, तो आप इसकी जगह खीरे का जूस भी पी सकते हैं।
2. ताजे फल और हरी सब्जियां
बाज़ार में मिलने वाले पैकेट बंद जूस को भूल जाइए। सेब, केला, संतरा, पपीता—जो भी मौसमी फल आपके इलाके में आसानी से मिलते हैं, उन्हें खाइए। मेरे अनुभव में आया है कि जो फल पेड़ से टूटने के जितनी जल्दी हमारे पेट में जाता है, उसका प्राण उतना ही ऊंचा होता है। अगर आप सुबह के नाश्ते में सिर्फ फल खाते हैं, तो आप खुद देखेंगे कि दोपहर तक आपको भारीपन या नींद का अहसास नहीं होगा।
3. भीगे हुए मेवे और अंकुरित अनाज (स्प्राउट्स)
मूंग, चना या बादाम को जब हम पानी में भिगोते हैं, तो उनके अंदर का सोया हुआ जीवन जाग उठता है। एक सूखा हुआ बीज मिट्टी में डालने पर शायद न उगे, लेकिन भीगा हुआ बीज तुरंत अंकुरित होने लगता है क्योंकि उसमें प्राण बढ़ जाता है। रोज़ सुबह एक मुट्ठी भीगे हुए बादाम या अंकुरित मूंग खाना आपके शरीर को एक अलग ही लेवल की ताकत देता है।
4. शुद्ध शहद
शहद को आयुर्वेद और योग में अमृत माना गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसकी रासायनिक बनावट हमारे खून (हीमोग्लोबिन) से बहुत मिलती-जुलती है। अगर आप गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीते हैं, तो यह आपके शरीर में जादुई तरीके से ऊर्जा का संचार करता है। लेकिन याद रहे, शहद को कभी भी उबलते हुए पानी में नहीं डालना चाहिए, इससे उसके गुण नष्ट हो जाते हैं।
प्याज और लहसुन का सच
इस बात पर बहुत से लोगों को आपत्ति हो सकती है। लोग कहेंगे कि लहसुन तो सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है, डॉक्टर भी बताते हैं। हाँ, यह सच है कि इनमें औषधीय गुण होते हैं और जब आप बीमार हों, तो ये दवा का काम करते हैं। लेकिन रोज़ के खाने में इनका इस्तेमाल आपके दिमाग को अशांत करता है।
मैंने खुद यह प्रयोग करके देखा है। जब मैंने पंद्रह दिनों के लिए अपने खाने से प्याज और लहसुन को पूरी तरह हटा दिया, तो मेरे गुस्से में कमी आई और मेरा दिमाग ज्यादा स्थिर रहने लगा। अगर आप ध्यान या कोई दिमागी काम करते हैं, तो इनका परहेज आपको बहुत फायदा पहुंचाएगा।
चाय और कॉफी का मायाजाल
हमें लगता है कि चाय या कॉफी पीने से हमें एनर्जी मिलती है। लेकिन सच तो यह है कि यह आपके शरीर से उधार ली गई एनर्जी होती है। यह आपके नर्वस सिस्टम को एक झटका देती है, जिससे आपको लगता है कि आप फ्रेश हो गए हैं। लेकिन दो घंटे बाद जब इसका असर खत्म होता है, तो आप पहले से भी ज्यादा थका हुआ महसूस करते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक थके हुए घोड़े को चाबुक मारकर दौड़ाना।
बासी और प्रोसेस्ड खाना
आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में फ्रिज हमारा सबसे बड़ा मददगार बन गया है। रात की बची सब्ज़ी सुबह खाना या हफ्तेभर का आटा गूंथकर फ्रिज में रख देना आम बात है। लेकिन योग विज्ञान कहता है कि पकने के डेढ़ से दो घंटे के भीतर भोजन की प्राण ऊर्जा खत्म होने लगती है। इसके बाद वह सिर्फ एक बेजान कचरा रह जाता है जिसे पचाने में शरीर को अपनी बची-कुची ऊर्जा भी लगानी पड़ती है। डिब्बाबंद चिप्स, बिस्कुट और रेडी-टू-ईट फूड तो महीनों पुराने होते हैं, उनमें भला प्राण कहाँ से बचेगा?
न्यूट्रल प्राणिक भोजन: बीच का रास्ता
कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें खाने से न तो आपकी ऊर्जा बहुत बढ़ती है और न ही घटती है। आलू और टमाटर इसी केटेगरी में आते हैं। आलू खाने से आपको कार्बोहाइड्रेट मिलता है, पेट भरता है, लेकिन यह आपको थोड़ा सुस्त भी बना सकता है। अगर आप इन्हें सीमित मात्रा में खाते हैं, तो यह नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इनसे बहुत ज्यादा जीवनी शक्ति की उम्मीद भी नहीं रखनी चाहिए।
मेरे कुछ निजी टिप्स: प्राणिक भोजन को आदत कैसे बनाएं
सब कुछ जानने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या हम आज से ही सब कुछ छोड़ दें? नहीं, बिल्कुल नहीं। बदलाव धीरे-धीरे होना चाहिए ताकि आपका शरीर और मन उसके लिए तैयार हो सके।
* 70/30 का नियम अपनाएं: कोशिश करें कि आपके पूरे दिन के भोजन का कम से कम 70% हिस्सा पॉजिटिव प्राणिक हो (जैसे फल, कच्ची सब्जियां, मेवे) और बाकी का 30% हिस्सा आप अपनी पसंद का पका हुआ खाना खा सकते हैं।
* खुश मन से पकाएं और खाएं: भोजन सिर्फ इस बात से तय नहीं होता कि प्लेट में क्या है। इस बात से भी तय होता है कि उसे बनाते समय आपके दिमाग में क्या चल रहा था। अगर आप गुस्से या तनाव में खाना बनाएंगे, तो उस खाने में भी वही नेगेटिव वाइब्स चली जाएंगी।
* चबा-चबा कर खाएं: हमारे बड़े-बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि खाने को इतना चबाओ कि वह मुंह में ही पानी बन जाए। जब आप ऐसा करते हैं, तो भोजन में आपके मुंह की लार मिलती है, जो पाचन को आसान बनाती है और भोजन का प्राण शरीर आसानी से सोख पाता है।
अपनी रसोई को एक दवाखाने की तरह मत देखिए, इसे अपनी ऊर्जा का स्रोत बनाइए। आज ही से अपनी डाइट में छोटा सा बदलाव करके देखिए, जैसे सुबह खाली पेट एक गिलास पानी और एक फल खाना शुरू कीजिए। कुछ ही दिनों में आप खुद महसूस करेंगे कि आपके अंदर का आलस गायब हो रहा है और आप हर काम को दोगुनी फुर्ती से कर पा रहे हैं। आखिर हमारा शरीर ही हमारा पहला घर है, इसे साफ और ऊर्जावान रखना हमारी अपनी ज़िम्मेदारी है।
आप भी इसे आज़माकर देखें और खुद बदलाव महसूस करें। आपको अपनी सेहत में क्या फर्क नजर आया, मुझे जरूर बताइएगा।
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