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मेटाबॉलिज्म को तेज करने और फैट बर्न करने वाले 3 एडवांस प्राणायाम
क्या आप जिम और डाइटिंग से थक चुके हैं? जानिए 3 प्रभावी प्राणायाम जो आपकी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाएंगे और जिद्दी चर्बी को तेजी से पिघलाने में मदद करेंगे। सेहत की ओर एक सरल कदम बढ़ाएं!मेटाबॉलिज्म को तेज करने और फैट बर्न करने वाले 3 एडवांस प्राणायाम
YOGA THERAPY
Rajesh Kumar
5/6/20261 मिनट पढ़ें


नमस्ते दोस्तों! कैसे हैं आप सब? उम्मीद है कि आप अपनी सेहत का ख्याल रख रहे होंगे। आज मैं आपसे एक ऐसी चीज़ के बारे में बात करना चाहता हूँ, जो हम सबके लिए सिरदर्द बनी हुई है—वो है शरीर का मेटाबॉलिज्म।
आपने देखा होगा कि कुछ लोग कितना भी खा लें, वो हमेशा फिट रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग सिर्फ पानी भी पी लें, तो उन्हें लगता है कि वजन बढ़ गया। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। जहाँ तक वास्तविकता की बात है, मैंने जिम में घंटों पसीना बहाया, डाइटिंग की, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। फिर मेरे अनुभव में आया कि असली खेल तो हमारे शरीर के अंदर चल रही 'आग' यानी मेटाबॉलिज्म का है।
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि योग की दुनिया में ऐसी कौन सी जादुई तकनीकें हैं, जो आपके शरीर की इस भट्टी को फिर से सुलगा सकती हैं।
कपालभाति: पेट की चर्बी को पिघलाने वाली संजीवनी
मेरे प्यारे दोस्तों, अगर आप मुझसे पूछें कि वेट लॉस के लिए सबसे पावरफुल चीज़ क्या है, तो मैं बिना सोचे कपालभाति का नाम लूँगा। इसे वैसे तो 'शुद्धि क्रिया' कहा जाता है, लेकिन इसके फायदे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं।
मुझे याद है, जब मैंने पहली बार कपालभाति शुरू की थी, तो मुझे लगता था कि सिर्फ सांस बाहर छोड़ने से क्या होगा? लेकिन जैसे-जैसे मैंने इसे अपनी रूटीन में शामिल किया, मुझे महसूस हुआ कि यह आपके पेट के अंगों की अंदरूनी मसाज करता है।
इसे करने का सही तरीका क्या है?
इसे करना बहुत आसान है। बस सीधे बैठ जाएं और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब एक लंबी गहरी सांस लें और फिर झटके से सांस को नाक से बाहर निकालें। ध्यान रहे, आपको सिर्फ सांस बाहर छोड़ने पर जोर देना है, सांस अपने आप अंदर चली जाएगी। जब आप सांस छोड़ें, तो आपका पेट अंदर की तरफ पिचकना चाहिए।
यह मेटाबॉलिज्म पर कैसे काम करता है?
जब आप कपालभाति करते हैं, तो आपके पेट के आसपास के हिस्से में बहुत गर्मी पैदा होती है। मैंने देखा है कि यह गर्मी आपके पाचन तंत्र को एक्टिव कर देती है। विज्ञान की भाषा में कहें तो यह आपकी 'बेसल मेटाबॉलिक रेट' (BMR) को बढ़ा देता है। इसका मतलब है कि आप आराम करते समय भी ज़्यादा कैलोरी बर्न कर रहे होते हैं।
शुरुआत में आप इसे 2 से 3 मिनट करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाकर 10-15 मिनट तक ले जाएं। लेकिन हाँ, अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है, तो इसे बहुत आराम से करें या किसी एक्सपर्ट की सलाह लें।
भस्त्रिका प्राणायाम: शरीर का पावर इंजन
आइए अब जानते हैं एक ऐसे प्राणायाम के बारे में जिसे मैं 'बॉडी का बूस्टर' कहता हूँ। भस्त्रिका का मतलब होता है 'धौंकनी'। जैसे लोहार आग को तेज करने के लिए धौंकनी से हवा मारता है, ठीक वैसे ही यह प्राणायाम आपके शरीर की अग्नि को तेज करता है।
मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा था, "यार, दोपहर होते-होते मेरी एनर्जी बिल्कुल खत्म हो जाती है, क्या करूँ?" मैंने उसे भस्त्रिका करने की सलाह दी। कुछ ही दिनों में उसने बताया कि अब उसे दिन भर थकान महसूस नहीं होती।
भस्त्रिका कैसे करें?
इसमें आपको पूरी ताकत के साथ सांस अंदर लेनी है और उतनी ही ताकत के साथ बाहर छोड़नी है। अपनी मुट्ठियों को कंधों के पास रखें। सांस भरते हुए हाथों को ऊपर ले जाएं और मुट्ठी खोल दें, फिर सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे लाएं और मुट्ठी बंद कर लें। इसे एक लय में करें।
फैट बर्न करने में इसकी भूमिका
भस्त्रिका आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है और खून में ऑक्सीजन की मात्रा को एकदम से बढ़ा देता है। जब आपके सेल्स को भरपूर ऑक्सीजन मिलती है, तो वे फैट को एनर्जी में बदलने का काम तेजी से करने लगते हैं। यह सीधे आपके थायराइड ग्लैंड पर भी असर डालता है, जो हमारे मेटाबॉलिज्म का कंट्रोल सेंटर है। अगर आपका थायराइड ठीक से काम करेगा, तो आपका वजन अपने आप कंट्रोल में रहने लगेगा।
इसे खाली पेट करना सबसे अच्छा रहता है। मुझे लगता है कि सुबह-सुबह ताजी हवा में भस्त्रिका करने से जो एनर्जी मिलती है, वो किसी कप कॉफी से कहीं ज्यादा बेहतर है।
सूर्य भेदन प्राणायाम: अंदरूनी गर्मी को जगाना
जहाँ तक फैट बर्न करने की बात है, आयुर्वेद और योग में 'सूर्य' को ऊर्जा और गर्मी का प्रतीक माना गया है। हमारे शरीर में दो मुख्य नाड़ियाँ होती हैं—इड़ा (चंद्र) और पिंगला (सूर्य)। सूर्य भेदन प्राणायाम में हम अपनी दाईं नासिका (Right Nostril) का उपयोग करते हैं।
मुझे पहले लगता था कि दोनों नाक से सांस लेना एक जैसा ही है, लेकिन योग विज्ञान कहता है कि दाईं नाक से सांस लेना हमारे शरीर में गर्मी पैदा करता है। अगर आपको बहुत ज्यादा ठंड लगती है या आपका डाइजेशन बहुत सुस्त है, तो यह आपके लिए बेस्ट है।
करने की विधि:
अपनी बाईं नाक को अनामिका (Ring finger) से बंद करें और दाईं नाक से गहरी सांस लें। अब दाईं नाक को बंद करें और बाईं ओर से सांस बाहर निकाल दें। ध्यान रहे, हर बार सांस दाईं ओर से ही लेनी है और बाईं ओर से ही छोड़नी है।
मेटाबॉलिज्म के लिए इसके फायदे:
यह प्राणायाम आपके 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' को एक्टिव करता है। इससे शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है, जिससे जमा हुआ फैट टूटने लगता है। इसे 'एडवांस' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बहुत जल्दी असर दिखाता है। लेकिन मेरी एक सलाह याद रखिएगा—इसे गर्मी के मौसम में बहुत ज्यादा न करें, क्योंकि यह शरीर में काफी हीट पैदा कर सकता है। सर्दियों में तो यह किसी वरदान जैसा है।
कुछ छोटी मगर जरूरी बातें
मेरे प्यारे दोस्तों, प्राणायाम कोई जादू की छड़ी नहीं है कि आज किया और कल वजन कम हो गया। इसके लिए निरंतरता (consistency) बहुत जरूरी है। मैंने देखा है कि लोग दो दिन जोश में करते हैं और फिर छोड़ देते हैं। ऐसा न करें।
साथ ही, अपनी डाइट का भी थोड़ा ख्याल रखें। अगर आप एक तरफ भस्त्रिका कर रहे हैं और दूसरी तरफ समोसे खा रहे हैं, तो बात नहीं बनेगी। ताज़ा खाना खाएं, खूब पानी पिएं और इन प्राणायामों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं।
एक और बात जो मैंने महसूस की है—तनाव (Stress) मेटाबॉलिज्म का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर 'कोर्टिसोल' नाम का हार्मोन बनाता है, जो पेट की चर्बी को जमा करता है। प्राणायाम न सिर्फ फैट बर्न करते हैं, बल्कि आपके दिमाग को भी शांत रखते हैं। जब दिमाग शांत होगा, तो शरीर अपने आप बेहतर काम करेगा।
मैंने खुद अपनी लाइफ में इन बदलावों को देखा है। मेरी सुस्ती गायब हो गई, स्किन पर ग्लो आया और सबसे बड़ी बात, मुझे अपनी बॉडी में बहुत हल्कापन महसूस होने लगा।
तो, क्या आप तैयार हैं कल सुबह से इसे शुरू करने के लिए? मुझे पूरा यकीन है कि अगर आप इसे पूरी ईमानदारी से करेंगे, तो आपको किसी महंगे फैट बर्नर सप्लीमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
अपनी सेहत को समय दीजिए, क्योंकि अंत में यही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। अगर आपके मन में कोई सवाल हो या आप अपने अनुभव शेयर करना चाहें, तो बेझिझक बताएं। मुझे आपकी मदद करके खुशी होगी।
आज के लिए बस इतना ही, फिर मिलेंगे किसी नए विषय के साथ। तब तक खुश रहिए, स्वस्थ रहिए!
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