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मन को तुरंत शांत करने के लिए निर्गुण भजनों के साथ ध्यान कैसे लगाएं?
क्या आप भी शोर से परेशान हैं? इस लेख में जानें कैसे निर्गुण भजन सुनकर आप मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। सरल और प्रभावी तरीके से सुकून पाने का जादुई तरीका यहाँ है!मन को तुरंत शांत करने के लिए निर्गुण भजनों के साथ ध्यान कैसे लगाएं?
साधना विज्ञान
Rajesh Kumar
3/29/20261 मिनट पढ़ें


मेरे प्यारे दोस्तों, क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह उठते ही दिमाग में भागदौड़ शुरू हो जाती है? कल की चिंता, आज के काम की लिस्ट और ऊपर से ये फोन की टिंग-टिंग! मुझे लगता है कि आजकल हम सब इसी कश्ती में सवार हैं। सच बताऊं तो, कुछ समय पहले तक मैं खुद भी बहुत परेशान रहता था। रात को नींद नहीं आती थी और दिन भर ऐसा लगता था जैसे दिमाग में कोई शोर मच रहा हो। मैंने बहुत कोशिश की—कभी योग किया, कभी शांत बैठने की कोशिश की, लेकिन वो मन है न, कहीं टिकता ही नहीं था।
फिर एक दिन, मुझे याद आया कि मेरी दादी अक्सर एक पुराना टेप रिकॉर्डर बजाती थीं, जिसमें कबीर के भजन बजते थे। तब तो मैं बच्चा था, समझ नहीं आता था। पर पिछले महीने जब मैं बहुत तनाव में था, तो मैंने अचानक यूट्यूब पर 'निर्गुण भजन' खोजा। मैंने कुमार गंधर्व जी की आवाज़ में एक भजन सुना और यकीन मानिए, दस मिनट के अंदर मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे तपते हुए माथे पर ठंडी पट्टी रख दी हो।
यहीं से मुझे समझ आया कि ध्यान (meditation) करने के लिए हमेशा एकदम सन्नाटा होना ज़रूरी नहीं है। अगर हम सही संगीत, खासकर निर्गुण भजनों का सहारा लें, तो मन को काबू करना बहुत आसान हो जाता है। आइए अब जानते हैं कि ये जादुई चीज़ आखिर काम कैसे करती है और आप इसे अपनी रोज़ाना की ज़िंदगी में कैसे शामिल कर सकते हैं।
आखिर ये निर्गुण भजन इतने खास क्यों हैं?
जहां तक वास्तविकता की बात है, निर्गुण शब्द का मतलब है 'बिना किसी रूप के'। सरल भाषा में कहूं तो, ये भजन किसी खास मूर्ति या चेहरे की बात नहीं करते, बल्कि ये हमारे अंदर छिपी उस रूह या आत्मा की बात करते हैं जो हम सबके भीतर एक जैसी है। कबीर, गोरखनाथ या बुल्ले शाह जैसे संतों ने जो लिखा, वो सीधे दिल पर चोट करता है।
मेरे अनुभव में आया है कि जब हम सामान्य गाने सुनते हैं, तो हमारा मन बाहर की दुनिया में भटकने लगता है। लेकिन निर्गुण भजन हमें अपने अंदर झांकने पर मजबूर कर देते हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाले वाद्य यंत्र, जैसे इकतारा या खड़ताल, उनकी आवाज़ सीधे हमारे दिमाग की नसों को शांत करती है। मुझे लगता है कि ये भजन सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक थेरेपी हैं।
ध्यान लगाने के लिए सही माहौल कैसे बनाएं?
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि आपको शुरुआत कैसे करनी है। देखिए, मैं कोई बड़ा गुरु तो नहीं हूं, पर जो मैंने सीखा है वही आपको बता रहा हूं। ध्यान लगाने के लिए आपको हिमालय पर जाने की ज़रूरत नहीं है।
सबसे पहले, अपने घर का कोई ऐसा कोना चुनिए जहां शोर कम हो। ये आपकी बालकनी हो सकती है या आपके कमरे का एक कोना। मैंने देखा है कि अगर आप ज़मीन पर एक पतली दरी बिछाकर बैठें, तो ज़्यादा अच्छा महसूस होता है। लेकिन अगर आपके घुटनों में दर्द है, तो कुर्सी पर बैठना भी एकदम ठीक है। बस अपनी पीठ को सीधा रखें ताकि आप आलस में न आ जाएं।
एक और ज़रूरी बात, अपने फोन को 'डू नॉट डिस्टर्ब' पर डाल दें। ये जो नोटिफिकेशन की आवाज़ है, ये ध्यान की सबसे बड़ी दुश्मन है। मैंने कई बार गलती की कि ध्यान करने बैठा और बीच में किसी का मैसेज आ गया, फिर पूरा मूड खराब हो जाता है। इसलिए, उन 15-20 मिनट के लिए दुनिया को भूल जाइए।
भजनों का चुनाव कैसे करें?
ये एक बहुत बड़ा सवाल है। बाज़ार में या इंटरनेट पर हज़ारों भजन हैं, पर ध्यान के लिए आपको 'धीमी लय' वाले भजन चुनने चाहिए। ऐसे भजन जिनमें शोर-शराबा कम हो और शब्द साफ़ सुनाई दें। कबीर के भजन जैसे "मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में" या "झिनी झिनी बीनी चदरिया" से आप शुरुआत कर सकते हैं।
मुझे व्यक्तिगत रूप से प्रहलाद टिपान्या जी या कुमार गंधर्व की आवाज़ बहुत पसंद है। उनकी आवाज़ में एक ऐसा ठहराव है जो आपको तुरंत शांत कर देता है। आप अपने हिसाब से कोई भी ऐसा गायक चुन सकते हैं जिसकी आवाज़ आपको भारी और सुकून भरी लगे।
ध्यान लगाने की पूरी प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप
चलिए, अब मुद्दे की बात पर आते हैं कि आपको करना क्या है।
आराम से बैठें: जैसे मैंने पहले कहा, आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं। अपनी आँखें धीरे से बंद कर लें। ज़ोर लगाकर आँखें बंद न करें, बस जैसे पलकें खुद गिर गई हों।
साँसों पर ध्यान दें: भजन शुरू करने से पहले, दो-तीन लंबी और गहरी साँसें लें। महसूस करें कि ताज़ा हवा आपके अंदर जा रही है और तनाव बाहर निकल रहा है।
संगीत शुरू करें: अब मध्यम आवाज़ में अपना चुना हुआ निर्गुण भजन चलाएं। आवाज़ इतनी हो कि आपको शब्द साफ़ सुनाई दें, पर इतनी तेज़ भी न हो कि कानों को चुभे।
शब्दों को सुनें, समझें नहीं: ये बात थोड़ी अजीब लग सकती है, पर इसे समझिए। आपको शब्दों का व्याकरण या मतलब खोजने की ज़रूरत नहीं है। बस उस आवाज़ को अपने कानों के रास्ते अंदर जाने दें। कबीर जब कहते हैं "माया तज दे", तो बस उस अहसास को महसूस करें।
भटकाव को स्वीकारें: मैंने देखा है कि जैसे ही हम ध्यान लगाने बैठते हैं, पुराने झगड़े, ऑफिस की बातें या कल क्या पकाना है, ये सब ख्याल आने लगते हैं। घबराइए मत! जब भी मन भटके, धीरे से अपना ध्यान वापस भजन की धुन पर ले आएं। खुद पर गुस्सा न करें।
संगीत और मौन का मेल
निर्गुण भजनों की सबसे अच्छी बात ये है कि ये अक्सर एक ही धुन को बार-बार दोहराते हैं। ये दोहराव हमारे दिमाग के लिए एक लोरी जैसा काम करता है। एक समय ऐसा आएगा जब आपको भजन के शब्द सुनाई देना बंद हो जाएंगे और सिर्फ एक गूंज रह जाएगी। वही वो पल है जब आप असल में ध्यान की स्थिति में होते हैं।
मैंने एक बार आज़माया था—लगभग 10 मिनट भजन सुनने के बाद, मैंने संगीत बंद कर दिया और अगले 5 मिनट सिर्फ सन्नाटे में बैठा रहा। आप यकीन नहीं करेंगे, वो 5 मिनट का सन्नाटा मुझे दुनिया के किसी भी संगीत से ज़्यादा मीठा लगा। ऐसा लगा जैसे मेरे अंदर सब कुछ ठहर गया है।
कुछ छोटी मगर काम की बातें
दोस्तों, मैं आपको एक राज़ की बात बताता हूं। ध्यान कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो एक ही दिन में सिद्ध हो जाएगी। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हम जिम जाते हैं। पहले दिन शरीर दुखता है, पर धीरे-धीरे आदत पड़ जाती है।
ज़बरदस्ती न करें: अगर किसी दिन मन बहुत ज़्यादा बेचैन है और भजन सुनने का मन नहीं कर रहा, तो छोड़ दें। ज़बरदस्ती बैठकर आप खुद को और तनाव देंगे।
समय का चुनाव: वैसे तो सुबह का समय सबसे अच्छा होता है, लेकिन मैंने देखा है कि रात को सोने से पहले निर्गुण भजन सुनना जादुई होता है। इससे नींद बहुत गहरी और अच्छी आती है।
हेडफोन का इस्तेमाल: अगर आपके घर में शोर रहता है, तो अच्छे क्वालिटी के हेडफोन का इस्तेमाल करें। इससे आप बाहरी शोर से कट जाएंगे और भजनों की बारीकियों को बेहतर सुन पाएंगे।
मेरा एक छोटा सा किस्सा
बात पिछले साल की है, जब मेरा एक बहुत ज़रूरी प्रोजेक्ट अटक गया था। मैं इतना परेशान था कि खाना-पीना भी भूल गया था। मुझे लग रहा था कि सब खत्म हो जाएगा। तभी अचानक मेरे एक दोस्त ने मुझे कबीर का एक पद भेजा—"धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय"।
मैंने उस दिन पहली बार इसे ध्यान लगाकर सुना। मुझे समझ आया कि हम कितनी बेकार की चीज़ों को पकड़कर बैठे रहते हैं। उस भजन ने मुझे सिखाया कि वक्त अपना काम करेगा, मुझे बस शांत रहना है। उस दिन के बाद से, जब भी मुझे लगता है कि स्थितियां मेरे काबू से बाहर जा रही हैं, मैं बस आँखें बंद करता हूं और अपने पसंदीदा निर्गुण भजन लगा लेता हूं।
निर्गुण भजन और मानसिक स्वास्थ्य
आजकल की भागदौड़ में हम अपने शरीर का तो ध्यान रखते हैं, पर मन का क्या? मुझे लगता है कि मानसिक शांति के लिए निर्गुण भजन एक सबसे सस्ता और असरदार तरीका है। ये भजन हमें सिखाते हैं कि खुशी बाहर की चीज़ों में नहीं, बल्कि हमारे अंदर है।
जब हम इन भजनों के साथ ध्यान लगाते हैं, तो हमारा 'कॉर्टिसोल' (तनाव वाला हार्मोन) कम होने लगता है। मैंने महसूस किया है कि इससे मेरा गुस्सा कम हुआ है और मैं चीज़ों को बेहतर तरीके से समझ पाता हूं।
अब आपकी बारी है
मेरे प्यारे दोस्तों, मैं आपसे बस इतना कहना चाहता हूं कि आज ही कोशिश करके देखिए। ज़रूरी नहीं कि आप एक घंटा बैठें। सिर्फ 10 मिनट निकालिए। एक अच्छा सा निर्गुण भजन लगाइए और खुद को उसमें डुबो दीजिए।
हो सकता है पहले दिन आपको कुछ खास महसूस न हो, लेकिन हार मत मानिएगा। जहाँ तक वास्तविकता की बात है, शांति कोई मंज़िल नहीं है, ये एक रास्ता है जिस पर हमें रोज़ चलना होता है।
मुझे पूरा भरोसा है कि अगर आप इसे अपनी आदत बना लेंगे, तो आप खुद में एक बड़ा बदलाव देखेंगे। आप ज़्यादा खुश रहेंगे, ज़्यादा शांत रहेंगे और छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ना बंद कर देंगे।
क्या आपने कभी किसी भजन के साथ ध्यान लगाने की कोशिश की है? या आपका पसंदीदा भजन कौन सा है? मुझे ज़रूर बताइएगा, मुझे आपकी बातें जानकर बहुत खुशी होगी।
तो बस, आज के लिए इतना ही। अपना ख्याल रखिए और अपने मन को शांत रख
ने के लिए रोज़ थोड़ा समय ज़रूर निकालिए।
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