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क्या पीरियड्स के दौरान योग करना सुरक्षित है
क्या आपको पीरियड्स के दिनों में योग करने या आराम करने में उलझन होती है? जानें कैसे हल्के योगासन पेट दर्द और ऐंठन से राहत दिला सकते हैं। इस पोस्ट में विशेष आसनों की जानकारी भी मिलेगी जिनसे इन दिनों बचना चाहिए।क्या पीरियड्स के दौरान योग करना सुरक्षित है
साधना विज्ञान
Rajesh Kumar
4/10/20261 मिनट पढ़ें


मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है सब बढ़िया होगा। आज हम एक ऐसे विषय पर बात करने वाले हैं जिसे लेकर हम महिलाओं के मन में अक्सर उलझन रहती है। जब वो महीने के वो 'खास दिन' आते हैं, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या आज जिम जाऊं? क्या आज योग मैट बिछाऊं? या फिर बस कंबल ओढ़कर सो जाऊं?
खासकर योग को लेकर बहुत सारी बातें सुनने को मिलती हैं। कोई कहता है कि पीरियड्स में योग करना वरदान है, तो कोई डरा देता है कि इससे ब्लीडिंग बढ़ जाएगी। मैंने खुद अपनी ज़िंदगी में इस कशमकश को महसूस किया है। सच कहूं तो, जहाँ तक वास्तविकता की बात है, इसका जवाब सिर्फ 'हाँ' या 'ना' में नहीं दिया जा सकता। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका शरीर उस वक्त कैसा महसूस कर रहा है।
आइए अब जानते हैं कि आखिर विज्ञान और हमारे शरीर का अनुभव इस बारे में क्या कहता है।
क्या पीरियड्स में योग करना वाकई सुरक्षित है?
सीधा सा जवाब है—हाँ, बिल्कुल सुरक्षित है! लेकिन यहाँ एक छोटा सा 'मगर' भी जुड़ा है। मैंने देखा है कि कई लड़कियां पीरियड्स के दौरान बिल्कुल बिस्तर पकड़ लेती हैं। उन्हें लगता है कि हिलने-डुलने से दर्द बढ़ जाएगा। लेकिन मेरे अनुभव में आया है कि हल्का-फुल्का योग और स्ट्रेचिंग उस दौरान होने वाले पेट दर्द और कमर के तनाव को कम करने में जादुई तरीके से काम करती है।
जब हम योग करते हैं, तो हमारे शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है। इससे मांसपेशियों को ऑक्सीजन मिलती है और जो ऐंठन (cramps) हमें परेशान कर रही होती है, उसमें काफी राहत मिलती है। तो अगर आप सोच रही हैं कि क्या आप मैट पर उतर सकती हैं, तो बेझिझक आगे बढ़िए। बस आपको यह पता होना चाहिए कि क्या करना है और क्या नहीं।
पीरियड्स के दौरान योग के फायदे
मैंने अक्सर अपनी सहेलियों से सुना है कि पीरियड्स में उनका मूड बहुत खराब रहता है। चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना या फिर बिना वजह रोना आना—ये सब हम झेलते हैं। यहाँ योग सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग को भी शांत करता है।
दर्द से राहत: पीरियड्स के दर्द के लिए पेनकिलर खाने से बेहतर मुझे हमेशा योग लगा है। कुछ खास आसन पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को आराम देते हैं।
मूड स्विंग्स पर काबू: योग करने से शरीर में 'हैप्पी हार्मोन्स' यानी एंडोर्फिन रिलीज होते हैं। इससे वो बेवजह का गुस्सा और उदासी कम होती है।
थकान और आलस दूर करना: उन दिनों में ऐसा लगता है जैसे शरीर में जान ही नहीं है। हल्का योग करने से आप खुद को ज्यादा ऊर्जावान महसूस करती हैं।
पीरियड्स में कौन से योगासन सबसे अच्छे हैं?
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और उन आसनों की बात करते हैं जो मैंने खुद आजमाए हैं और जिनसे मुझे वाकई सुकून मिला है। याद रखिए, इन दिनों हमें शरीर के साथ कुश्ती नहीं लड़नी है, बल्कि उसे प्यार से सहलाना है।
1. बाल आसन (Child's Pose)
यह मेरा सबसे पसंदीदा आसन है। जब भी मुझे पेट में तेज मरोड़ उठती है, मैं बस घुटनों के बल बैठकर आगे की तरफ झुक जाती हूँ। इस आसन में जब आप अपना माथा जमीन पर टिकाती हैं और लंबी सांस लेती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे सारा तनाव जमीन में समा गया हो। यह आपकी पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करने के लिए सबसे बेहतरीन है।
2. बद्ध कोणासन (Butterfly Pose)
मेरी एक दोस्त है रिया, उसे पीरियड्स में बहुत ज्यादा हैवी फील होता था। मैंने उसे बटरफ्लाई पोज़ ट्राई करने को कहा। इसे करते समय जब आप अपने पैरों के तलवों को मिलाकर तितली की तरह धीरे-धीरे हिलाती हैं, तो यह पेल्विक हिस्से को खोलता है। इससे भारीपन कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है।
3. मार्जरी आसन (Cat-Cow Pose)
पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए इससे अच्छा कुछ नहीं। धीरे-धीरे सांस लेते हुए अपनी कमर को ऊपर और नीचे करना एक कोमल मसाज जैसा महसूस होता है। मैंने देखा है कि यह आसन गैस और ब्लोटिंग (पेट फूलना) की समस्या में भी बहुत काम आता है, जो पीरियड्स के दौरान अक्सर हमें परेशान करती है।
4. सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Bound Angle Pose)
अगर आपको बहुत ज्यादा थकान महसूस हो रही है और आप हिलना नहीं चाहतीं, तो बस तकिए का सहारा लेकर इस आसन में लेट जाएं। यह आपके शरीर को पूरी तरह आराम देता है और मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
पीरियड्स के दौरान कौन से योग नहीं करने चाहिए?
जहाँ कुछ आसन आपको आराम देते हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनसे आपको इन दिनों तौबा कर लेनी चाहिए। मैंने कई बार देखा है कि जोश-जोश में लड़कियां वही रूटीन फॉलो करती हैं जो वो बाकी दिनों में करती हैं, जो गलत है।
उल्टे होने वाले आसन (Inversions) से बचें:
शीर्षासन (Headstand), सर्वांगासन (Shoulder stand) या हलासन जैसे आसनों को इन दिनों बिल्कुल न करें। आयुर्वेद और योग विज्ञान का मानना है कि पीरियड्स के दौरान शरीर की ऊर्जा का प्रवाह नीचे की तरफ (Apana Vayu) होना चाहिए। जब हम उल्टे खड़े होते हैं, तो हम इस प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालते हैं। इससे ब्लीडिंग रुक सकती है या आगे चलकर दूसरी दिक्कतें हो सकती हैं।
बहुत कठिन एक्सरसाइज:
अगर आप बहुत भारी पावर योग या बहुत ज्यादा स्ट्रेचिंग वाले आसन करती हैं, तो इन दिनों उन्हें थोड़ा धीमा कर दें। शरीर पहले से ही अंदरूनी सफाई की प्रक्रिया में लगा हुआ है, उसे अतिरिक्त तनाव न दें।
अपने शरीर की आवाज सुनना सबसे जरूरी है
मुझे लगता है कि सबसे बड़ी गलती जो हम करते हैं, वो है खुद की तुलना दूसरों से करना। हो सकता है आपकी कोई सहेली पीरियड्स के दूसरे दिन भी कठिन योग कर लेती हो, लेकिन अगर आपका शरीर सिर्फ लेटने की मांग कर रहा है, तो उसकी बात सुनिए।
मैंने अपनी लाइफ में यह सीखा है कि हर महीना एक जैसा नहीं होता। कभी दर्द कम होता है तो मैं पूरी योग क्लास कर लेती हूँ, और कभी-कभी मैं सिर्फ 10 मिनट के लिए प्राणायाम करके ही खुश हो जाती हूँ। अगर आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है या चक्कर आ रहे हैं, तो उस दिन योग मैट को रहने दें। आराम करना भी रिकवरी का एक हिस्सा है।
कुछ जरूरी बातें जो ध्यान रखनी चाहिए
जब आप इन दिनों में योग शुरू करें, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने अनुभव को और भी बेहतर बना सकती हैं:
कपड़ों का चुनाव: कोशिश करें कि बहुत टाइट कपड़े न पहनें। ढीले और आरामदायक सूती कपड़े पहनें ताकि आप खुलकर सांस ले सकें।
हाइड्रेशन: योग से पहले और बाद में पानी जरूर पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से ऐंठन बढ़ सकती है।
हल्का खाना: योग करने से कम से कम 2-3 घंटे पहले कुछ भारी न खाएं। वैसे भी पीरियड्स में हल्का खाना पाचन के लिए अच्छा रहता है।
सांसों पर ध्यान: योग सिर्फ शरीर को हिलाना नहीं है। गहरी सांस लेना सबसे जरूरी है। जब आप लंबी सांस लेती हैं, तो मांसपेशियों को रिलैक्स होने का संकेत मिलता है।
पीरियड्स और प्राणायाम का रिश्ता
अगर आपको लग रहा है कि आसन करना मुश्किल है, तो प्राणायाम आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। 'भ्रामरी प्राणायाम' या 'अनुलोम-विलोम' करने से दिमाग एकदम शांत हो जाता है। पीरियड्स के दौरान होने वाले सिरदर्द में भ्रामरी (मधुमक्खी जैसी आवाज निकालना) बहुत राहत देता है। यह मैंने खुद आजमाया है और यह सच में कमाल करता है।
समाज के मिथक और हकीकत
हमारे समाज में आज भी कई लोग मानते हैं कि पीरियड्स के दौरान महिला को 'अशुद्ध' माना जाना चाहिए और उसे कोई भी शारीरिक गतिविधि नहीं करनी चाहिए। लेकिन मेरे प्यारे दोस्तों, यह कोई बीमारी नहीं है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। पुराने जमाने में आराम करने की सलाह इसलिए दी जाती थी क्योंकि तब सैनिटरी पैड्स जैसी सुविधाएं नहीं थीं और महिलाओं को बहुत भारी शारीरिक काम करने पड़ते थे। आज के दौर में हम अपनी सुविधा के अनुसार अपने शरीर का ख्याल रख सकते हैं।
योग आपको आपके शरीर से जोड़ता है। यह आपको सिखाता है कि आप अपनी तकलीफ को कैसे स्वीकार करें और उसे कैसे कम करें।
चलते-चलते मेरी एक सलाह
पीरियड्स के दौरान योग करना न केवल सुरक्षित है बल्कि यह एक वरदान साबित हो सकता है, बस शर्त इतनी है कि आप इसे सही तरीके से करें। अपने आप पर ज्यादा दबाव न डालें। अगर आप सिर्फ 5 मिनट के लिए भी स्ट्रेचिंग करती हैं, तो वह भी काफी है।
अगली बार जब आपको लगे कि पीरियड्स की वजह से आप सुस्त महसूस कर रही हैं, तो एक बार हल्की स्ट्रेचिंग करके देखिएगा। आप खुद महसूस करेंगी कि आपका मूड और शरीर दोनों कितने खिल उठे हैं। अपने शरीर को प्यार दें, उसकी सुनें और याद रखें कि आप इस प्राकृतिक चक्र में भी उतनी ही सशक्त और ऊर्जावान हैं जितनी बाकी दिनों में।
अपना अनुभव मेरे साथ जरूर शेयर कीजिएगा, मुझे जानकर बहुत खुशी होगी। खुश रहिए और अपना ख्याल रखिए!
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