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शुरुआत कैसे करें? योग साधकों के लिए एक सरल डाइट चार्ट

क्या आप योग साधक हैं और सही आहार की तलाश में हैं? हमारे ब्लॉग में जानें एक सरल सात्विक डाइट चार्ट, जो आपको सुबह से रात तक हल्का और एनर्जेटिक रखेगा। समोसे और पिज्जा की क्रेविंग को छोड़कर स्वस्थ भोजन की ओर कदम बढ़ाएं!शुरुआत कैसे करें? योग साधकों के लिए एक सरल डाइट चार्ट

साधना विज्ञान

Rajesh Kumar

5/25/20261 मिनट पढ़ें

शुरुआत कैसे करें? योग साधकों के लिए एक सरल डाइट चार्ट
शुरुआत कैसे करें? योग साधकों के लिए एक सरल डाइट चार्ट

मेरे प्यारे दोस्तों, अगर आपने हाल ही में योग करना शुरू किया है, तो सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई! चटाई (yoga mat) पर कदम रखना ही अपने आप में एक बड़ा फैसला है। लेकिन अक्सर योग क्लास से बाहर आते ही हमारे दिमाग में एक बड़ा सवाल घूमता है—"यार, अब खाएं क्या?"

मैंने देखा है कि लोग योग तो खूब मन लगाकर करते हैं, लेकिन जैसे ही भूख लगती है, वे समोसे या पिज्जा पर टूट पड़ते हैं। या फिर कुछ लोग इसके बिल्कुल उलट करते हैं। वे इंटरनेट पर 'योगिक डाइट' ढूंढने लगते हैं और खुद को सिर्फ उबली हुई सब्जियों पर सीमित कर लेते हैं। सच कहूं? ये दोनों ही तरीके गलत हैं।

योग कोई सजा नहीं है, और न ही योग की डाइट का मतलब भूखे मरना है। जहां तक वास्तविकता की बात है, योग और भोजन का रिश्ता बहुत गहरा है। जैसा अन्न, वैसा मन—यह बात सौ फीसदी सच है। तो चलिए, अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि एक योग साधक की थाली कैसी होनी चाहिए।

योग और भोजन का क्या कनेक्शन है?

कुछ दिन पहले की बात है, मेरी एक सहेली ने योग क्लास जाना शुरू किया। तीन-चार दिन बाद वह मुझसे बोली, "पता नहीं क्यों, योग करने के बाद मुझे बहुत सुस्ती आती है।" जब मैंने उससे पूछा कि वह सुबह क्या खाकर जाती है, तो उसने बताया कि वह पराठे और चाय पीकर अभ्यास करने बैठती है।

बस, यहीं पर गड़बड़ हो जाती है।

मुझे लगता है कि योग सिर्फ शरीर को मोड़ना नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर की ऊर्जा को जगाना है। अगर आप भारी या बासी खाना खाएंगे, तो योग करते समय आपका शरीर भारी रहेगा। आपका मन ध्यान लगाने के बजाय सिर्फ उस खाने को पचाने में लगा रहेगा। योग के अनुकूल भोजन वह है जो आपको हल्का रखे, लेकिन साथ ही दिनभर के काम के लिए भरपूर ताकत भी दे।

सत्व, रज और तम: खाने के तीन रूप

हमारे पुराने ग्रंथों में भोजन को तीन भागों में बांटा गया है। इसे समझना बहुत आसान है।

सात्विक भोजन:

यह वह खाना है जो ताजा है, हल्का है और आसानी से पच जाता है। जैसे ताजे फल, सब्जियां, दालें और नट्स। इसे खाकर आप खुद को हल्का और खुश महसूस करते हैं।

राजसिक भोजन:

यह बहुत तीखा, तला-भुना और मसालों से भरपूर खाना होता है। जैसे रेस्टोरेंट की भारी ग्रेवी वाली सब्जियां या चाय-कॉफी। यह आपके मन को चंचल बनाता है।

तामसिक भोजन:

यह वह खाना है जो बासी है, डिब्बाबंद है या जिसमें मांस-मदिरा शामिल है। इसे खाकर सिर्फ नींद और आलस आता है।

मेरे अनुभव में आया है कि जब आप योग की शुरुआत करते हैं, तो आपका झुकाव अपने आप सात्विक भोजन की तरफ होने लगता है। आपका शरीर खुद ही बताने लगता है कि उसे क्या चाहिए।

योग साधकों के लिए सुबह का डाइट प्लान

आइए अब जानते हैं कि आपके दिन की शुरुआत कैसी होनी चाहिए। सुबह का समय सबसे खास होता है क्योंकि इस समय आपका पेट पूरी तरह खाली होता है।

जागने के तुरंत बाद (सुबह 6:00 से 6:30 बजे)

सोकर उठते ही सबसे पहले एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीजिए। अगर आप चाहें तो इसमें आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिला सकते हैं। यह आपके पेट को साफ करने में मदद करता है। चाय या कॉफी से दिन की शुरुआत करने की आदत को धीरे-धीरे बदलिए।

योग अभ्यास से ठीक पहले

क्या खाली पेट योग करना चाहिए? हां, बिल्कुल। लेकिन अगर आपको सुबह बहुत तेज भूख लगती है या कमजोरी महसूस होती है, तो आप योग करने से आधे घंटे पहले 4-5 भीगे हुए बादाम या एक केला खा सकते हैं। ध्यान रहे, पेट भरा हुआ बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

योग के बाद का नाश्ता (सुबह 8:30 से 9:00 बजे)

योग खत्म करने के कम से कम 30 मिनट बाद ही कुछ खाएं। आपका नाश्ता प्रोटीन और अच्छे कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होना चाहिए। यहाँ कुछ बेहतरीन विकल्प दिए गए हैं:

वेजिटेबल पोहा या उपमा:

इसमें खूब सारी गाजर, मटर और मूंगफली डालें।

मूंग दाल का चीला:

यह हल्का भी होता है और इसमें प्रोटीन भी भरपूर होता है।

ओट्स या दलिया:

आप इसे दूध के साथ बना सकते हैं या फिर सब्जियों के साथ नमकीन दलिया भी खा सकते हैं।

ताजे फल और अंकुरित अनाज (Sprouts):

एक कटोरी मिक्स फ्रूट्स के साथ थोड़े से उबले हुए चने या मूंग।

दोपहर के भोजन में क्या खाएं?

दोपहर का समय ऐसा होता है जब हमारी पाचन अग्नि (जठराग्नि) सबसे तेज होती है। इसलिए दिन का खाना थोड़ा अच्छा होना चाहिए, लेकिन इतना भी भारी नहीं कि खाकर सीधे नींद आ जाए।

लंच टाइम (दोपहर 1:00 से 2:00 बजे)

आपके दोपहर के भोजन में हर तरह के पोषक तत्व होने चाहिए। एक आदर्श सात्विक थाली ऐसी दिखनी चाहिए:

रोटी:

गेहूं के बजाय मल्टीग्रेन या बाजरा/ज्वार की रोटी चुनें। रोटी पर थोड़ा सा शुद्ध देसी घी जरूर लगाएं। घी हमारे जोड़ों के लिए बहुत जरूरी है, खासकर जब आप योग कर रहे हों।

चावल:

अगर चावल खाना पसंद है, तो सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या हाथ का कुटा हुआ चावल लें।

दाल या छोले:

अरहर, मूंग या मसूर की पतली दाल।

हरी सब्जी:

लौकी, तोरई, कद्दू, पालक या बीन्स जैसी मौसमी सब्जियां।

सलाद:

खाना खाने से पहले एक छोटी प्लेट खीरा, टमाटर और गाजर का सलाद जरूर खाएं।

(मट्ठा):

दोपहर के खाने के बाद एक गिलास जीरा और पुदीना डला हुआ छाछ अमृत के समान है। यह पाचन को एकदम दुरुस्त रखता है।

शाम की छोटी भूख का इलाज

अक्सर शाम को 4 से 5 बजे के बीच हमें कुछ चटपटा या मीठा खाने का मन करता है। यही वह वक्त है जब सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। हम बिना सोचे-समझे बिस्कुट, नमकीन या समोसे खा लेते हैं।

शाम के समय आप ये चीजें ले सकते हैं:

* एक कप हर्बल टी या ग्रीन टी (बिना चीनी के)।

* एक मुट्ठी भुने हुए मखाने या चने।

* नारियल पानी (यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है)।

* कोई भी एक मौसमी फल जैसे सेब या पपीता।

रात का खाना कैसा होना चाहिए?

सूर्यास्त के बाद हमारा शरीर आराम की मुद्रा में जाने लगता है, इसलिए रात का खाना हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए।

डिनर टाइम (शाम 7:00 से 8:00 बजे)

कोशिश करें कि रात का खाना सोने से कम से कम दो या तीन घंटे पहले खा लें। अगर आप रात को 10 बजे सोते हैं, तो 8 बजे तक हर हाल में डिनर कर लीजिए।

मिक्स वेजिटेबल सूप:

सर्दियों में यह बहुत बढ़िया विकल्प है।

खिचड़ी:

मूंग दाल और चावल की हल्की खिचड़ी, जिसमें थोड़ी सब्जियां भी कटी हों। यह पेट के लिए सबसे सुरक्षित और आरामदेह खाना है।

उबली हुई सब्जियां और पनीर:

अगर आप रात को भारी अनाज नहीं खाना चाहते, तो सब्जियों को हल्का टॉस करके पनीर के टुकड़ों के साथ खा सकते हैं।

सोने से पहले (रात 9:30 बजे)

यदि आपको रात में भूख लगती है या नींद आने में परेशानी होती है, तो सोने से आधा घंटा पहले एक कप गुनगुना दूध पीजिए। दूध में एक चुटकी हल्दी या थोड़ा सा जायफल पाउडर मिला लें। यह आपके शरीर की थकान को दूर करेगा और गहरी नींद लाने में मदद करेगा।

पानी पीने का सही तरीका

मैंने देखा है कि लोग इस बात पर तो बहुत ध्यान देते हैं कि क्या खाना है, लेकिन पानी कब और कैसे पीना है, इसे भूल जाते हैं। योग साधक के लिए पानी पीने के कुछ नियम बहुत जरूरी हैं:

* खाना खाने के तुरंत पहले और तुरंत बाद पानी कभी न पीएं। यह पेट के पाचक रसों को शांत कर देता है। खाने से आधा घंटा पहले या खाने के एक घंटे बाद ही पानी पीएं।

* अगर खाना खाते समय गला सूख रहा हो, तो एक या दो घूंट गुनगुना पानी लिया जा सकता है।

* हमेशा बैठ कर और घूंट-घूंट करके पानी पीएं। गट-गट करके लगातार पानी पीने से शरीर को उसका पूरा फायदा नहीं मिलता।

कुछ छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातें

इस नए सफर में आपको किसी तरह का तनाव लेने की जरूरत नहीं है। ऐसा नहीं है कि अगर आपने किसी दिन शादी में जाकर थोड़ा ज्यादा खा लिया, तो आपका योग बेकार हो गया। खुद पर बहुत ज्यादा सख्ती मत कीजिए।

यहाँ कुछ आसान बातें हैं जिन्हें आप आज से ही शुरू कर सकते हैं:

1. **चबा-चबा कर खाएं:

अपने खाने को इतना चबाइए कि वह मुंह में ही लिक्विड बन जाए। इससे पेट का आधा काम आसान हो जाता है।

2. **खुश मन से खाएं:

जब आप गुस्से में हों, टीवी देख रहे हों या फोन स्क्रॉल कर रहे हों, तब खाना मत खाइए। खाने को पूरे सम्मान और शांति के साथ खाएं।

3. पैकेट वाली चीजों को कहें बाय-बाय:

चिप्स, नूडल्स, फ्रोजन फूड और कोल्ड ड्रिंक्स से जितनी दूरी बना सकें, बना लें। इनमें कोई जीवन ऊर्जा (प्राण) नहीं होती।

4. ताजा खाना ही सबसे बेस्ट है:

फ्रिज में रखा हुआ तीन दिन पुराना खाना खाने से बचें। कोशिश करें कि खाना बनने के ३-४ घंटे के भीतर उसे खा लिया जाए।

योग का मतलब सिर्फ शरीर को लचीला बनाना नहीं है, बल्कि अपने जीवन को एक सही ढर्रे पर लाना है। जब आप अच्छा और शुद्ध खाना खाएंगे, तो आप देखेंगे कि चटाई पर आपके लिए आसन करना और भी आसान हो गया है। आपका शरीर खुद-ब-खुद आपका साथ देने लगेगा।

तो दोस्तों, इस सरल डाइट चार्ट को अपनाकर देखिए। शुरुआत में छोटे-छोटे बदलाव कीजिए। पहले हफ्ते सिर्फ सुबह का नाश्ता बदलिए, फिर धीरे-धीरे बाकी चीजों को अपनी आदत में शामिल कीजिए। मुझे पूरा विश्वास है कि आपको अपने शरीर और मन में एक बहुत ही खूबसूरत बदलाव महसूस होगा। ऑल द बेस्ट!

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