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हाई ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल करने के लिए शीतली और शीतकारी प्राणायाम कैसे करें
क्या आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है? जानें कैसे 'शीतली' और 'शीतकारी' प्राणायाम आपके बीपी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। आसान भाषा में व्यक्तिगत अनुभव के साथ सीखें।हाई ब्लड प्रेशर को तुरंत कंट्रोल करने के लिए शीतली और शीतकारी प्राणायाम कैसे करें
YOGA THERAPY
Rajesh Kumar
5/8/20261 मिनट पढ़ें


नमस्ते दोस्तों! कैसे हैं आप सब? उम्मीद है सब बढ़िया होगा। आज हम एक ऐसी चीज़ पर बात करने वाले हैं जो आजकल घर-घर की कहानी बन गई है—हाई ब्लड प्रेशर।
आपको पता है, कुछ दिन पहले मैं अपने एक पुराने दोस्त के घर गया था। वह बेचारा बड़ा परेशान दिख रहा था। पूछने पर पता चला कि ऑफिस के काम और भागदौड़ की वजह से उसका बीपी अचानक बढ़ गया और उसे चक्कर आने लगे। उसने दवा तो ले ली थी, लेकिन वह अंदर से बहुत बेचैन था। तब मैंने उसे वही सलाह दी जो आज मैं आप सबको देने वाला हूँ। मैंने उससे कहा, "भाई, थोड़ा रुक, लंबी सांस ले और ज़रा 'शीतली' और 'शीतकारी' करके देख।"
हैरानी की बात यह है कि सिर्फ 10-15 मिनट के अभ्यास के बाद ही वह काफी शांत महसूस करने लगा। तो चलिए, आज मैं आपको भी इन दो जादुई प्राणायामों के बारे में विस्तार से बताता हूँ।
हाई ब्लड प्रेशर और हमारा शरीर
जहां तक वास्तविकता की बात है, हमारा शरीर एक मशीन की तरह है। जब हम बहुत ज़्यादा तनाव लेते हैं या बहुत गर्म चीज़ें खाते हैं, तो मशीन 'ओवरहीट' हो जाती है। हाई ब्लड प्रेशर का मतलब भी यही है कि आपके दिल को खून पंप करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। डॉक्टर दवा तो देते ही हैं, लेकिन अगर हम अपने शरीर को अंदर से ठंडा करना सीख जाएं, तो बात ही कुछ और है।
शीतली प्राणायाम: शरीर को अंदर से ठंडा करने का तरीका
शीतली शब्द का मतलब ही है 'शीतलता' यानी ठंडक। यह प्राणायाम आपके शरीर के तापमान को कम करने और दिमाग को शांत करने में बहुत मदद करता है। मेरे अनुभव में आया है कि जब गुस्सा बहुत तेज़ आ रहा हो, तब भी यह बड़े काम की चीज़ है।
इसे कैसे करें?
1. सबसे पहले किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं। आप सुखासन (पालथी मारकर) या कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं। बस अपनी कमर सीधी रखें।
2. अब अपनी जीभ को बाहर निकालें और उसे एक नली या पाइप की तरह गोल मोड़ लें।
3. अब इस बनी हुई नली से धीरे-धीरे सांस अंदर खींचें। आपको महसूस होगा कि ठंडी हवा आपकी जीभ से होते हुए गले और पेट तक जा रही है। यह एहसास वाकई बहुत सुकून देने वाला होता है।
4. जब पूरी सांस अंदर ले लें, तो जीभ अंदर करें और मुंह बंद कर लें।
5. अब नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
कितनी बार करें?
शुरुआत में आप इसे 10 से 15 बार कर सकते हैं। मैंने देखा है कि जैसे-जैसे आप इसे करते हैं, आपकी बेचैनी कम होने लगती है।
शीतकारी प्राणायाम: जब जीभ गोल न हो पाए
अब देखिए, हर कोई अपनी जीभ को पाइप की तरह गोल नहीं मोड़ पाता। यह पूरी तरह जेनेटिक है। तो क्या वे लोग यह प्राणायाम नहीं कर सकते? बिल्कुल कर सकते हैं! उनके लिए 'शीतकारी' है।
इसे करने का तरीका:
1. अपने ऊपर और नीचे के दांतों को आपस में मिला लें।
2. अपने होंठों को खोलें ताकि दांत दिखाई दें।
3. अब दांतों के बीच के गैप से सांस अंदर खींचें। 'सी-सी' जैसी आवाज़ आएगी और ठंडी हवा सीधे आपके मसूड़ों और मुंह के अंदर जाएगी।
4. सांस पूरी भरने के बाद मुंह बंद करें और नाक से धीरे-धीरे बाहर निकाल दें।
मुझे लगता है कि शीतकारी उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें मसूड़ों की समस्या है या जिनका बीपी तनाव की वजह से एकदम से ऊपर चला जाता है।
यह बीपी पर कैसे काम करता है?
अब आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ सांस लेने-छोड़ने से बीपी कैसे कम हो सकता है? तो मेरे प्यारे दोस्तों, इसके पीछे एक सीधा सा विज्ञान है। जब हम इन ठंडी सांसों को अंदर लेते हैं, तो यह हमारे 'पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम' को एक्टिवेट कर देती हैं। यह सिस्टम हमारे शरीर को 'रिलैक्स' मोड में डाल देता है।
जब शरीर शांत होता है, तो दिल की धड़कन धीमी होती है और खून की नलियां चौड़ी हो जाती हैं। इससे खून का बहाव आसान हो जाता है और आपका बीपी तुरंत नीचे आने लगता है।
अभ्यास के दौरान मेरी कुछ खास सलाह
मैंने अक्सर देखा है कि लोग प्राणायाम करते समय बहुत जल्दी में रहते हैं। वे सोचते हैं कि 2 मिनट में सब ठीक हो जाएगा। पर सच तो यह है कि योग और प्राणायाम धैर्य का खेल हैं।
जल्दबाजी न करें:
सांस लेने और छोड़ने की गति बहुत धीमी रखें। जितना धीमा आप करेंगे, फायदा उतना ही ज़्यादा होगा।
साफ हवा में बैठें:
कोशिश करें कि आप किसी खिड़की के पास या पार्क में बैठकर इसे करें। गंदी या धूल वाली जगह पर यह उतना असर नहीं करेगा।
खाली पेट बेहतर है:
सुबह-सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा है, लेकिन अगर बीपी अचानक बढ़ गया है, तो आप इसे कभी भी कर सकते हैं। बस ध्यान रहे कि तुरंत भारी खाना न खाया हो।
किसे यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए?
यह जानना भी बहुत ज़रूरी है। आइए अब जानते हैं कि किन स्थितियों में आपको इससे बचना चाहिए:
* अगर आपको बहुत ज़्यादा सर्दी-जुकाम है, तो इसे न करें क्योंकि यह शरीर को और ठंडा कर देगा।
* जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है, वे भी इसे न करें।
* सर्दियों के मौसम में इसे बहुत कम समय के लिए करें।
एक छोटी सी कहानी
मुझे याद है मेरी एक चाची हैं, उन्हें बरसों से हाई बीपी की दिक्कत थी। वह हमेशा चिड़चिड़ी रहती थीं। एक बार मैंने उन्हें सिर्फ 5 मिनट रोज़ शीतली प्राणायाम करने को कहा। पहले तो उन्होंने मज़ाक उड़ाया कि "सांस लेने से क्या होगा?" लेकिन जब उन्होंने इसे लगातार एक हफ्ता किया, तो उन्होंने खुद फोन करके बताया कि अब उन्हें नींद बेहतर आती है और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं आता।
यही तो योग की ताकत है! यह सिर्फ बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि जीने का ढंग बदल देता है।
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं
हाई बीपी को मैनेज करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, बस आपको अपने शरीर की भाषा समझनी होगी। दवाइयां अपनी जगह हैं, लेकिन अपनी जीवनशैली में इन छोटे-छोटे बदलावों को शामिल करना आपको लंबी रेस का घोड़ा बनाएगा।
आजकल की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में हम खुद को समय देना भूल जाते हैं। ये 10 मिनट जो आप शीतली और शीतकारी को देंगे, ये दरअसल आप खुद को दे रहे हैं।
तो दोस्तों, आज से ही इसे शुरू करके देखिए। यकीन मानिए, आपका शरीर आपको धन्यवाद देगा। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो अपने उन दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ ज़रूर शेयर करें जो अक्सर तनाव में रहते हैं या जिनका बीपी हाई रहता है।
स्वस्थ रहें, खुश रहें और लंबी-लंबी ठंडी सांसें लेते रहें!
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