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अष्टांग योग के 'यम' और 'नियम' को आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कैसे उतारें

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अष्टांग योग के यम (अहिंसा, सत्य आदि) और नियम (संतोष, तप आदि) को अपनाकर खुद को शांत और खुश कैसे रखें, जानें। अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस महत्वपूर्ण जानकारी को जरूर पढ़ें।अष्टांग योग के 'यम' और 'नियम' को आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कैसे उतारें

साधना विज्ञान

Rajesh Kumar

3/31/20261 मिनट पढ़ें

अष्टांग योग के 'यम' और 'नियम' को आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कैसे उतारें
अष्टांग योग के 'यम' और 'नियम' को आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कैसे उतारें

मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? उम्मीद है कि आप अपनी जिंदगी की इस भागदौड़ में थोड़ा समय खुद के लिए भी निकाल पा रहे होंगे।

आज मैं आपके साथ दिल की कुछ ऐसी बातें साझा करना चाहता हूं, जो मुझे लगता है कि आज के समय में हम सबके लिए बहुत जरूरी हैं। हम सब एक ऐसी रेस में दौड़ रहे हैं जिसका कोई अंत नहीं दिखता। सुबह अलार्म बजने से लेकर रात को बिस्तर पर गिरने तक, हम बस भाग ही रहे हैं। कभी ऑफिस की डेडलाइन, कभी बच्चों की पढ़ाई, तो कभी सोशल मीडिया पर दूसरों की 'परफेक्ट' जिंदगी देखकर होने वाली बेचैनी।

ऐसे में अक्सर मेरा मन करता है कि काश कोई ऐसा जीपीएस होता जो जिंदगी की इस उलझन से बाहर निकलने का रास्ता दिखा देता। फिर मैंने योग के बारे में गहराई से पढ़ना शुरू किया। लेकिन रुकिए, यहां मैं सिर्फ हाथ-पैर मोड़ने या कठिन आसन करने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं बात कर रहा हूं अष्टांग योग के उन पहले दो सीढ़ियों की, जिन्हें हम 'यम' और 'नियम' कहते हैं।

ईमानदारी से कहूं तो, जब मैंने पहली बार इनके बारे में सुना, तो मुझे लगा कि ये तो साधु-संतों की बातें हैं। हमारे जैसे आम लोगों के लिए भला इनका क्या काम? पर जैसे-जैसे मैंने इन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उतारना शुरू किया, मुझे समझ आया कि ये तो दरअसल 'लाइफ मैनेजमेंट' के सबसे बेहतरीन तरीके हैं।

यम: समाज और लोगों के साथ कैसा हो हमारा व्यवहार?

यम का मतलब है वो नैतिक नियम जो हमें दूसरों के साथ व्यवहार करना सिखाते हैं। इसमें पांच चीजें आती हैं। आइए अब जानते हैं कि इन्हें आज की दुनिया में हम कैसे लागू कर सकते हैं।

1. अहिंसा: सिर्फ मार-पिटाई न करना ही काफी नहीं है

अहिंसा का नाम सुनते ही हमारे मन में आता है कि किसी को शारीरिक चोट न पहुंचाना। लेकिन मेरे अनुभव में आया है कि आज के दौर में सबसे बड़ी हिंसा हम अपनी जुबान और अपने विचारों से करते हैं।

सोचिए, ऑफिस में किसी जूनियर ने गलती कर दी और हमने उसे सबके सामने बुरी तरह डांट दिया। क्या यह हिंसा नहीं है? या फिर सोशल मीडिया पर किसी अजनबी की पोस्ट पर कोई कड़वा कमेंट कर दिया? जहां तक वास्तविकता की बात है, अहिंसा का मतलब है अपने मन में दूसरों के प्रति नफरत न रखना। खुद को और दूसरों को मानसिक शांति देना ही सच्ची अहिंसा है।

2. सत्य: खुद से झूठ बोलना बंद करें

सत्य का मतलब सिर्फ सच बोलना नहीं है, बल्कि सच्चाई के साथ जीना है। आज हम 'दिखावे' की दुनिया में जी रहे हैं। हम वो दिखने की कोशिश करते हैं जो हम हैं ही नहीं। महंगे फोन की ईएमआई भर रहे हैं क्योंकि समाज में टशन दिखाना है, भले ही अंदर से हम तनाव में हों।

मुझे लगता है कि अगर हम खुद से ईमानदार हो जाएं, तो आधी टेंशन वैसे ही खत्म हो जाएगी। सच बोलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह आपको हल्का महसूस कराता है।

3. अस्तेय: समय और क्रेडिट की चोरी से बचें

अस्तेय का सीधा सा मतलब है चोरी न करना। अब आप कहेंगे, "भाई, मैं चोर थोड़ी ही हूं!" लेकिन रुकिए। क्या हम दूसरों के आइडियाज चुराकर अपना नहीं बताते? क्या हम ऑफिस के समय में घंटों रील्स देखकर कंपनी का समय नहीं चुराते?

जब हम किसी और की मेहनत या हक छीनते हैं, तो वह भी अस्तेय के खिलाफ है। अगर हम सिर्फ उतना ही लें जितने के हम हकदार हैं, तो मन बहुत शांत रहता है।

4. ब्रह्मचर्य: अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं

अक्सर लोग ब्रह्मचर्य का मतलब सिर्फ अविवाहित रहने से जोड़ लेते हैं। लेकिन आज के संदर्भ में, इसका मतलब है अपनी ऊर्जा (Energy) को फालतू की चीजों में बर्बाद न करना।

हम दिन भर में कितनी ऊर्जा वेब सीरीज देखने, गॉसिप करने या बिना मतलब की बहस करने में खर्च कर देते हैं? अपनी इंद्रियों पर थोड़ा काबू पाना और उस ऊर्जा को अपने सपनों या अपनी सेहत पर लगाना ही असली ब्रह्मचर्य है। मैंने देखा है कि जब मैं अपने फोन का इस्तेमाल कम करता हूं, तो मेरी रचनात्मकता अपने आप बढ़ जाती है।

5. अपरिग्रह: जरूरत और चाहत के बीच का फर्क समझें

यह मेरा पसंदीदा है। अपरिग्रह का मतलब है 'जरूरत से ज्यादा इकट्ठा न करना'। हमारा घर उन चीजों से भरा पड़ा है जिनकी हमें जरूरत ही नहीं है। अलमारी में ऐसे कपड़े हैं जो सालों से नहीं पहने, पर हम उन्हें फेंकते या दान नहीं करते।

जितना ज्यादा सामान, उतनी ज्यादा चिंता। 'मिनिमलिज्म' का जो कॉन्सेप्ट आज पश्चिम से आ रहा है, वह हमारे पूर्वजों ने सदियों पहले अपरिग्रह के रूप में दिया था। चीजों को पकड़कर रखना छोड़िए, जिंदगी आसान हो जाएगी।

नियम: खुद को बेहतर बनाने का अनुशासन

यम जहां दूसरों के साथ व्यवहार की बात करता है, वहीं 'नियम' हमारे अपने अनुशासन के बारे में है। अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और नियमों की बात करते हैं।

1. शौच: केवल शरीर नहीं, मन की सफाई भी

शौच का मतलब है पवित्रता। सुबह नहा-धोकर साफ कपड़े पहनना तो अच्छी बात है ही, लेकिन उससे भी जरूरी है मन की सफाई। जैसे हम रोज नहाते हैं, वैसे ही रोज अपने मन से ईर्ष्या, जलन और गुस्से को बाहर निकालना जरूरी है।

मैं क्या करता हूं? रोज सोने से पहले 5 मिनट शांत बैठता हूं और दिन भर के सारे बुरे विचारों को वहीं छोड़ देता हूं। यह 'मेंटल डिटॉक्स' आज के समय में बहुत जरूरी है।

2. संतोष: जो है, उसमें खुश रहना सीखें

संतोष का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप मेहनत करना छोड़ दें या तरक्की की चाह न रखें। इसका मतलब है कि जो आज आपके पास है, उसका आनंद लेना।

हम अक्सर सोचते हैं, "जब मेरी सैलरी 1 लाख होगी, तब मैं खुश होऊंगा" या "जब मेरा अपना घर होगा, तब सुकून मिलेगा"। यकीन मानिए दोस्तों, खुशी कभी कल पर नहीं टिकती। अगर आप आज खुश नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं हो पाएंगे। अपनी छोटी-छोटी कामयाबियों का जश्न मनाना सीखें।

3. तप: अनुशासन की भट्टी में खुद को तपाना

आज की पीढ़ी (जिसमें मैं भी शामिल हूं) को सब कुछ 'इंस्टेंट' चाहिए। इंस्टेंट नूडल्स, इंस्टेंट मैसेजिंग, इंस्टेंट सक्सेस। लेकिन जिंदगी ऐसे नहीं चलती। तप का मतलब है अपने लक्ष्य के लिए अनुशासित रहना, चाहे मन हो या न हो।

सर्दियों की सुबह अलार्म बजने पर भी बिस्तर छोड़कर योग के लिए उठना 'तप' है। जंक फूड के सामने होने पर भी अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए उसे न खाना 'तप' है। बिना अनुशासन के कोई भी इंसान महान नहीं बन सकता।

4. स्वाध्याय: खुद को पढ़ना सबसे बड़ी पढ़ाई है

हमने स्कूल-कॉलेज की बहुत सारी किताबें पढ़ लीं, लेकिन क्या कभी खुद को पढ़ा? स्वाध्याय का मतलब है आत्म-अध्ययन। अपनी गलतियों को देखना, अपने व्यवहार को समझना और अच्छी प्रेरक किताबें पढ़ना।

जब हम खुद को समझना शुरू करते हैं, तो हमें दूसरों की कमियां दिखना बंद हो जाती हैं। मैं अक्सर डायरी लिखता हूं, जिससे मुझे यह समझने में मदद मिलती है कि मैं कहां गलत था और मैं कैसे बेहतर बन सकता हूं।

5. ईश्वर प्रणिधान: सब कुछ उस पर छोड़ देना

भले ही आप भगवान को मानते हों या नहीं, लेकिन इस ब्रह्मांड में कोई तो शक्ति है जो सब चला रही है। ईश्वर प्रणिधान का मतलब है 'समर्पण'। हम अक्सर हर चीज को कंट्रोल करना चाहते हैं, और जब चीजें हमारे हिसाब से नहीं होतीं, तो हम टूट जाते हैं।

कभी-कभी गहरी सांस लेकर यह कहना कि "मैंने अपनी पूरी मेहनत की है, अब नतीजा जो भी हो, मुझे मंजूर है" - यही ईश्वर प्रणिधान है। यह आपको बहुत बड़े मानसिक बोझ से आजाद कर देता है।

इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा कैसे बनाएं?

अब आप सोच रहे होंगे कि "कहना तो आसान है, पर करना मुश्किल"। आपकी बात सही है। एक ही दिन में कोई भी योगी नहीं बन जाता। मैंने भी जब शुरुआत की थी, तो मैं भी बहुत बार फेल हुआ।

एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। पिछले महीने मैंने तय किया कि मैं 'संतोष' का पालन करूंगा। उसी हफ्ते मेरे एक दोस्त ने नई चमचमाती कार खरीदी। मेरा मन हुआ कि मैं भी अपनी पुरानी कार बदल लूं। लेकिन फिर मैंने खुद को रोका। मैंने सोचा, क्या मेरी कार चल नहीं रही? क्या वह मुझे समय पर ऑफिस नहीं पहुंचा रही? जवाब था- हां। फिर मैंने उस चाहत को वहीं रोक दिया और अपनी पुरानी कार की सफाई करके उसी में खुश रहने का फैसला किया। उस दिन मुझे जो सुकून मिला, वो नई कार की ईएमआई भरने के तनाव से कहीं बेहतर था।

मेरे कुछ छोटे टिप्स जो आपके काम आ सकते हैं:

* एक समय में एक चीज: अगले एक हफ्ते तक सिर्फ 'अहिंसा' पर ध्यान दें। कोशिश करें कि किसी को बुरा न बोलें।

* डिजिटल डिटॉक्स: 'अपरिग्रह' का पालन करते हुए अपने फोन से उन ऐप्स को डिलीट कर दें जो सिर्फ आपका समय बर्बाद करते हैं।

* 5 मिनट का मौन: 'शौच' और 'स्वाध्याय' के लिए दिन में कम से कम 5 मिनट बिल्कुल अकेले और शांत बैठें।

दोस्तों, योग कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप चटाई पर बैठकर 1 घंटा करें और फिर भूल जाएं। यह तो जीने का एक तरीका है। यम और नियम हमें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करते हैं। और यकीन मानिए, जिस दिन आप एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे, यह भागदौड़ भरी जिंदगी आपको थकाएगी नहीं, बल्कि आपको हर पल का आनंद लेना सिखा देगी।

तो, आप आज से कौन सा 'यम' या 'नियम' अपनी लाइफ में अपनाने वाले हैं? मुझे जरूर बताइएगा। आखिर हम सब इस सफर में साथ ही तो हैं!

अगली बार फिर मिलेंगे कुछ और ऐसी ही बातों के साथ। तब तक के लिए अपना ख्याल रखें और मुस्कुराते रहें।